May 1, 2026

क्यों 52 रुपए का पेट्रोल 94 रुपए में बिकता है? जानिए पूरी कीमत का गणित

दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की खुदरा कीमत फिलहाल 94.77 रुपए है, लेकिन इसकी असली लागत यानी बेस प्राइस केवल 52.83 रुपए है। इसके बावजूद जनता को लगभग 42 रुपए अधिक चुकाने पड़ते हैं। इसकी वजह है पेट्रोल की कीमत में जुड़ने वाले कई प्रकार के टैक्स और शुल्क, जो सरकार और डीलर द्वारा वसूले जाते हैं। पेट्रोल की इस कीमत में ट्रांसपोर्ट खर्च 0.24 रुपए, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी 21.90 रुपए, डीलर का कमीशन 4.40 रुपए और राज्य सरकार का वैट 15.40 रुपए प्रति लीटर शामिल है। इन सभी को जोड़कर पेट्रोल की कुल कीमत 94.77 रुपए प्रति लीटर बनती है।

डीजल के मामले में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। दिल्ली में एक लीटर डीजल के लिए उपभोक्ता को 87.67 रुपए चुकाने पड़ते हैं, जबकि इसकी बेस कीमत केवल 53.75 रुपए है। इसमें ट्रांसपोर्ट खर्च 0.26 रुपए, डीलर कमीशन 3.03 रुपए, एक्साइज ड्यूटी 17.80 रुपए और वैट 12.83 रुपए प्रति लीटर जुड़कर कुल कीमत 87.67 रुपए हो जाती है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सबसे बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार के टैक्स का होता है, जो तेल की वास्तविक कीमत से कहीं ज्यादा बनता है। आम लोगों को यह जानकारी शायद ही हो कि वह जो भुगतान कर रहे हैं, उसमें तेल की असली लागत कम और टैक्स का हिस्सा ज्यादा होता है।

इसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ता है और महंगाई पर भी। पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महंगा होता है और रोजमर्रा की जरूरी चीजें भी महंगी हो जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने पर भी इसका फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंचता क्योंकि सरकार टैक्स घटाने को तैयार नहीं होती।

जब तक ईंधन को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया जाता या टैक्स ढांचा नहीं सुधारा जाता, तब तक पेट्रोल और डीजल महंगे ही मिलते रहेंगे। इसलिए जब आप पेट्रोल पंप पर एक लीटर तेल भरवाएं, तो यह समझना जरूरी है कि आप सिर्फ तेल नहीं बल्कि उस पर लगे भारी टैक्स भी भर रहे हैं।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!