भूटान पर चीन की नजर, सीमा में घुसपैठ और गांव बसाने की चाल—जनरल द्विवेदी के दौरे से बढ़ी ड्रैगन की बेचैनी
चीन की विस्तारवादी नीतियां एक बार फिर उजागर हो रही हैं और इस बार निशाने पर है भारत का घनिष्ठ पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार – भूटान। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने भूटानी सीमा के भीतर दर्जनों गांव बसाकर न केवल जमीन कब्जाने की कोशिश की है, बल्कि अब वह भूटान की संसद और सुरक्षा परोक्ष रूप से दबाव बनाने की रणनीति पर भी काम कर रहा है। इस बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की चार दिवसीय भूटान यात्रा से ड्रैगन खेमे में हलचल तेज हो गई है।
यह दौरा इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि जनरल द्विवेदी का यह भूटान का पहला दौरा है और वह वहां भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और रॉयल भूटान आर्मी के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बट्टू शेरिंग से मुलाकात कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में भारत-भूटान रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई रणनीतिक फैसले लिए जा सकते हैं।
भूटान की सीमाओं में चीन की घुसपैठ कोई नई बात नहीं है। पिछले आठ सालों में ड्रैगन ने वहां 20 से ज्यादा अवैध गांव बसाए हैं, जिनमें से आठ गांव डोकलाम जैसे रणनीतिक इलाके में हैं। यही नहीं, चीन ने भूटान के उत्तरी हिस्से में स्थित जकारलुंग और पासमलुंग घाटियों पर भी दावा जताकर विवाद खड़ा किया है। ये वही क्षेत्र हैं जहां चीन बार-बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा है।
चीन की चालबाजियों की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती। अब उसने भूटान के पूर्वी हिस्से, सकतेंग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, पर भी दावा ठोक दिया है, जबकि यह क्षेत्र चीन की सीमा से सीधा जुड़ा हुआ भी नहीं है। चीन इसे एक “विवादित क्षेत्र” बताकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन अब तिब्बत से सटी भूटानी सीमा पर चरवाहों के जरिए भी जमीन कब्जाने की नीति अपना रहा है। तिब्बती भेष में आए चरवाहों को चीन अपने नागरिक बताता है और जब भूटानी सेना उन्हें रोकती है, तो चीन इसका विरोध करता है।
हालात तब और गंभीर हो गए जब डोकलाम के पास अमो-छू नदी के किनारे चीन की पीएलए ने भूटान के सैनिकों को पेट्रोलिंग से रोक दिया, जिसके बाद दोनों सेनाओं के बीच फ्लैग मीटिंग भी हुई।
इस बीच भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि भूटान को लेकर उसकी नीति एक मजबूत मित्रता और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित है। भूटान की ज्यादातर सैन्य ट्रेनिंग भारत में होती है और हाल ही में दोनों देशों के बीच चौथी विकास सहयोग वार्ता भी संपन्न हुई है।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी की यात्रा इसी रणनीतिक समझ का हिस्सा है — भारत चीन की हरकतों पर नज़र बनाए हुए है और भूटान को स्पष्ट संदेश दे रहा है कि वह हर परिस्थिति में उसके साथ खड़ा रहेगा। भारत यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि डोकलाम जैसी स्थिति दोबारा न पैदा हो, और अगर चीन इस दिशा में कोई कदम उठाता है, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ड्रैगन की इन हरकतों के बीच भारत और भूटान की एकजुटता ही उसका सबसे बड़ा जवाब बन सकती है।
Share this content:
