May 3, 2026

ईरान-इजराइल टकराव में किनारे खड़े रूस-चीन: पुराने दोस्त या केवल रणनीतिक साथी?

13 जून को इजराइल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई, लेकिन चीन और रूस जैसे ईरान के पारंपरिक सहयोगी केवल बयान देने तक ही सीमित रहे। चीन ने सार्वजनिक रूप से हमले की निंदा की, लेकिन किसी प्रकार की सैन्य या प्रत्यक्ष सहायता से दूरी बना ली। बीजिंग ने केवल कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की वकालत की और शांति की अपील दोहराई।

 

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मसले पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की और युद्धविराम की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी समकक्ष से फोन पर संपर्क कर इजराइल की आलोचना की। इसके बावजूद चीन ने संघर्ष में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग जोखिम उठाने से परहेज करता है और क्षेत्रीय अस्थिरता से दूर रहना चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब उसके व्यापारिक हित दांव पर हैं।

 

चीन की यह रणनीति उसकी ऊर्जा निर्भरता से जुड़ी है। अमेरिकी एनर्जी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के निर्यात किए जाने वाले 80-90% तेल का मुख्य खरीदार चीन है। यदि संघर्ष बढ़ता, तो चीन की तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता था। यही वजह है कि बीजिंग ने संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाई।

 

रूस की भूमिका भी लगभग समान रही। उसने कोई प्रत्यक्ष सैन्य मदद नहीं दी, बल्कि केवल बयानबाजी तक सीमित रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रूस और चीन वास्तव में ईरान के सहयोगी हैं या सिर्फ अपने-अपने रणनीतिक हितों तक सीमित?

 

संघर्ष के दौरान चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस और पाकिस्तान के साथ मिलकर एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया, जिसमें ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की गई और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की गई। हालांकि, अमेरिका द्वारा इस प्रस्ताव पर वीटो का अंदेशा पहले से ही बना हुआ था।

 

इस बीच, चीन ने मिस्र और ओमान जैसे क्षेत्रीय देशों से भी संपर्क किया और तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें कीं। वहीं, शी जिनपिंग और पुतिन के बीच हुई बातचीत में दोनों ने संपर्क बनाए रखने और तनाव कम करने पर सहमति जताई, लेकिन जमीन पर किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं की गई।

 

ईरान चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य भी बना है। ईरान ने चीन और रूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भी भाग लिया है, लेकिन मौजूदा संकट में ये रणनीतिक साझेदार सहयोग से ज्यादा दूरी बनाए रखने वाले नजर आए।

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