राजा रघुवंशी मर्डर केस : खुल गई सारी परते! मिल गया मास्टरमाइंड
23 मई की वो रात, जब मेघालय की वादियों में एक दुल्हन अपने पति के साथ घूमने निकली थी, अचानक एक खौफनाक कहानी में बदल गई। ऊंची पहाड़ियों के बीच, तेज बहते झरनों की आवाज़ और चारों तरफ फैली हरियाली में कोई सोच भी नहीं सकता था कि कुछ ही पलों में यहां एक पति को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया जाएगा।
पर कहानी यहां खत्म नहीं होती — ये बस शुरुआत थी उस राज़ की, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। एक नई शादी, एक खूबसूरत हनीमून डेस्टिनेशन, और फिर हत्या। लेकिन जैसे-जैसे इस केस की तहकीकात आगे बढ़ी, खुलासों की बर्फ पिघलती गई और एक के बाद एक परतें हटती गईं। आखिरकार, पुलिस ने इस खौफनाक साजिश के मास्टरमाइंड का पता लगा लिया है — और हैरानी की बात ये कि उसने खुद को छुपाने के लिए एक फर्जी नाम का इस्तेमाल किया था।
इंदौर के चर्चित कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या महज गुस्से या तात्कालिक झगड़े का नतीजा नहीं थी, बल्कि एक लंबी साजिश का हिस्सा थी, जिसकी पटकथा शादी से भी पहले लिखी जा चुकी थी। जांच में सामने आया है कि राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी ने शादी से पहले ‘संजय वर्मा’ नामक व्यक्ति से 100 से ज्यादा बार बातचीत की थी।
लेकिन असल कहानी तो तब सामने आई जब पुलिस को पता चला कि ‘संजय वर्मा’ असल में कोई और नहीं, बल्कि सोनम का प्रेमी राज कुशवाहा था, जिसने नकली पहचान बनाकर न केवल सोनम से संपर्क रखा, बल्कि उसके साथ मिलकर राजा को मौत के घाट उतारने की साजिश भी रची। यह सिर्फ प्यार का धोखा नहीं, बल्कि पूरी तरह सोच-समझकर किया गया मर्डर प्लान था।
हत्या से पहले तीन बार राजा को मारने की कोशिश की गई थी — गुवाहाटी, नोंग्रियाट और वेइसाडोंग फॉल्स में। लेकिन जब वो नाकाम रहे, तब 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में सोनम ने पार्किंग में खड़ी कार से किलर्स को इशारा दिया। इसके तुरंत बाद राजा पर धारदार हथियार से तीन वार किए गए — हर आरोपी ने एक-एक वार किया।
हत्या के बाद तीनों आरोपियों ने राजा का शव घाटी में फेंक दिया और सोनम ने चिल्लाते हुए पीछे हटकर खुद को ‘मासूम’ दिखाने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की जांच में यह साबित हो गया कि पूरी वारदात एक साजिश का हिस्सा थी, जिसका संचालन खुद सोनम और उसका प्रेमी राज कर रहे थे। हत्या में दो दाव (तेजधार हथियार) का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें से एक अभी भी लापता है।
वारदात के फौरन बाद सोनम ने अपने तीन मोबाइल फोन बंद किए और आरोपी आकाश को सौंप दिए, जिसने उन्हें नष्ट कर दिया। हालांकि ये फोन पुलिस के हाथ अब तक नहीं लगे हैं, लेकिन कॉल डिटेल्स और लोकेशन ट्रैकिंग ने पुलिस को कई अहम सुराग दे दिए हैं। सोनम के इन फोनों से न केवल ‘संजय वर्मा’ की असल पहचान का खुलासा हुआ, बल्कि इस पूरी साजिश का ताना-बाना भी समझ में आया।
और अब पुलिस की जांच का दायरा सिर्फ सोनम और उसके प्रेमी तक सीमित नहीं रहा। सोनम का भाई गोविंद रघुवंशी और उनके ऑफिस स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। क्राइम ब्रांच जानना चाह रही है कि क्या इस हत्या से किसी को आर्थिक लाभ हुआ, या इसके पीछे कोई और मकसद भी था?
मेघालय के डीजीपी इदाशीशा नोंगरांग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि इसे केवल ‘लव ट्रायंगल’ तक सीमित समझना गलत होगा। उनका कहना है कि एक नई दुल्हन इतनी जल्दी अपने पति से नफरत क्यों करने लगी, इसका जवाब तलाशना जरूरी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या सोनम ने शादी किसी योजना के तहत की थी और क्या इसमें कोई और लोग भी शामिल थे?
17 जून को पुलिस ने सभी आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर क्राइम सीन का रीकंस्ट्रक्शन कराया, ताकि वारदात की हर डिटेल साफ हो सके। पुलिस ने यह भी साफ किया है कि हत्या को अंजाम देने से पहले आरोपी होटल में मिले थे, जहां इस प्लान की आखिरी रणनीति बनाई गई थी।
राजा रघुवंशी की हत्या अब सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं रही। यह एक ऐसी शातिर प्लानिंग का केस बन चुका है, जिसमें प्यार की आड़ में फरेब छुपा था, और जिसमें मासूमियत की नकाब के पीछे छुपा था एक कातिल इरादा। और अब जब मास्टरमाइंड सामने है, देश की नजरें इस केस की हर अगली परत पर टिकी हैं — क्योंकि यह एक ऐसी कहानी है, जहां प्यार, धोखा और मौत ने एक-दूसरे का हाथ थामा था।
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