प्रतापगढ़ में मनरेगा भ्रष्टाचार की शिकायत ने भड़काया खूनी संघर्ष, लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी और फायरिंग में दोनों पक्षों के 12 लोग घायल
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में ग्राम पंचायत विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर एक ऐसा बवाल मच गया, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। मनरेगा फंड के दुरुपयोग को लेकर बीडीसी सदस्य और ग्राम प्रधान के बीच चल रही रंजिश ने बुधवार शाम खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। कहासुनी से शुरू हुआ विवाद लाठी-डंडों, कुल्हाड़ी और अंत में फायरिंग तक पहुंच गया। इस हिंसक टकराव में दोनों पक्षों के कुल 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
घटना प्रतापगढ़ के एक गांव की है, जहां बीडीसी सदस्य प्रमोद सिंह ने ग्राम प्रधान भारत सिंह पर मनरेगा फंड के गबन का आरोप लगाते हुए कुछ सप्ताह पहले शिकायत की थी। तभी से दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ था। बुधवार को इसी पुराने विवाद को लेकर गांव में फिर से कहासुनी हुई। पहले यह मामला केवल जुबानी बहस तक था, लेकिन कुछ ही देर में दोनों ओर से लोगों ने लाठी, डंडे, कुल्हाड़ी और हथियार निकाल लिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गांव में अफरा-तफरी मच गई जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला बोल दिया। इस दौरान जमकर लाठियां चलीं, कुल्हाड़ी से वार किए गए और बाद में फायरिंग भी हुई। बताया गया कि ग्राम प्रधान पक्ष से सुरेंद्र प्रताप सिंह (45), रोहित सिंह (20), प्रतिमा सिंह, पूनम सिंह, नितीश सिंह, मोनू और नागेंद्र घायल हुए। वहीं बीडीसी पक्ष से विनोद सिंह, अजय सिंह, कमला सिंह, पुनीता और शारदा सिंह को चोटें आईं।
सबसे गंभीर बात यह रही कि विनोद सिंह को पैर में गोली लगने की बात सामने आई है, जिससे यह साफ होता है कि टकराव केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हथियारों का भी खुलकर इस्तेमाल हुआ।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी (सीओ) सिटी शिवनारायण वैश, नगर कोतवाली पुलिस, और आस-पास की कई चौकियों के प्रभारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सभी घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है। पुलिस द्वारा गांव में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सभी आरोपी पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्राम पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायतें जब कार्रवाई की जगह हिंसा का रूप ले लें, तो इसका जिम्मेदार कौन है? ग्राम विकास के नाम पर मिलने वाला फंड यदि लोगों की जान पर बन आए, तो यह लोकतंत्र के सबसे निचले स्तर पर हिंसा की खतरनाक चेतावनी है।
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