May 3, 2026

नोएडा में क्रिकेट सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़, थाईलैंड और दुबई से चल रहा था ऑनलाइन रैकेट, 8 आरोपी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में क्रिकेट मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले एक इंटरनेशनल सट्टेबाजी गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस गैंग के आठ सदस्यों को कासना थाना पुलिस और स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी ग्रेनो वेस्ट की दो प्रमुख सोसाइटियों—व्हाइट ऑर्किड और राधा स्काई गार्डन से हुई। आरोपी एक बैन हो चुके ऐप के जरिए क्रिकेट मैचों के हर रन, चौका, छक्का और विकेट पर लाइव सट्टा लगवाते थे।

इस रैकेट का संचालन थाईलैंड और दुबई से किया जा रहा था और आरोपी भारत में बैठकर तकनीकी साधनों से इसमें सक्रिय थे। पुलिस को आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग उपकरण बरामद हुए हैं जिनमें 4 लैपटॉप, 26 मोबाइल, 16 सिम कार्ड, पासपोर्ट, कई पासबुक, चेकबुक और रजिस्टर शामिल हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भीम सिंह (22), नारायण (26), ध्रुव (24), मुकीम (19), विशाल कुमार (27), सन्नी जेतवा (27), हिमांशु दकान (20) और सुखदेव सिंह (31) के रूप में हुई है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश एक झूठे अपहरण की कहानी से हुआ।

दरअसल, राजस्थान के अलवर निवासी सुभाष चंद्र ने 12 जून को डायल 112 पर कॉल कर अपने बेटे भीम सिंह और भतीजे नारायण के अपहरण की सूचना दी थी। उसने बताया था कि अपहरणकर्ताओं ने 7 लाख रुपये फिरौती मांगी है। पुलिस ने जब उनकी तलाश शुरू की तो दोनों की लोकेशन ग्रेनो वेस्ट की एक सोसाइटी में मिली। वहां पहुंचकर पुलिस को पता चला कि ये दोनों अपहृत नहीं बल्कि खुद सट्टेबाजी गिरोह चला रहे थे। पूछताछ में भीम सिंह ने स्वीकार किया कि उसने खुद ही अपहरण की झूठी कहानी रची थी ताकि अपने पिता से पैसे निकलवा सके, क्योंकि उसके अकाउंट में करीब 7 लाख रुपये की गड़बड़ी हो गई थी और थाईलैंड में बैठे उसके बॉस का उस पर भुगतान करने का दबाव था।

गैंग का पूरा सिस्टम एक बैन किए गए मोबाइल ऐप के जरिए संचालित होता था। ग्राहक व्हाट्सऐप कॉल के जरिए इनसे संपर्क करते थे, जिसके बाद उन्हें एक फर्जी ID मुहैया कराई जाती थी और मैच के दौरान रियल टाइम में चौके, छक्के, विकेट या हार-जीत पर सट्टा लगवाया जाता था। फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड और बैंक अकाउंट्स इनके विदेशी नेटवर्क द्वारा उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अब तक करीब 5 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी कर चुका है।

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों तथा विदेशी संपर्कों की तलाश जारी है। साथ ही फर्जी बैंक खातों, दस्तावेजों और निवेश की भी जांच की जा रही है। मामला गंभीर साइबर अपराध और आर्थिक ठगी की दिशा में एक बड़ा संकेत है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!