ईरान पर छाने वाला है जंग का साया, और पाकिस्तान बन सकता है अमेरिका का अगला मोहरा – पर्दे के पीछे जो कुछ चल रहा है, वो चौंकाने वाला है…
इज़रायल और ईरान के बीच तनाव एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां से अब वापसी की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही। कनाडाई सीबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट्स और अमेरिकी खुफिया हलकों से निकलती चर्चाओं में अब यह लगभग साफ हो चुका है कि इज़रायल ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर एक सीधा और निर्णायक हमला करने की तैयारी में है। यह हमला सामान्य नहीं होगा, बल्कि एक पूरी जंग को न्योता देने जैसा होगा – और इसमें अमेरिका, इज़रायल के साथ खड़ा रहेगा।
युद्ध की इस संभावित पटकथा में सबसे रहस्यमयी और रणनीतिक रूप से अहम नाम अचानक सामने आया है—पाकिस्तान। वॉशिंगटन में बैठे अमेरिकी अधिकारी अचानक पाकिस्तान की खुलकर तारीफ करने लगे हैं। अमेरिका की ये ‘प्यारभरी बातें’ सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक बड़े गेमप्लान का हिस्सा हैं। जैसे ही इज़रायल के ईरान पर हमले की खबरें तेज़ हुईं, अमेरिका ने अपने बगदाद और एरबिल स्थित दूतावासों से स्टाफ निकालना शुरू कर दिया। डर है कि ईरान, जवाबी हमले में अमेरिकी ठिकानों और सैनिकों पर मिसाइल या ड्रोन हमले कर सकता है।
लेकिन यहां से कहानी में एक दिलचस्प मोड़ आता है—अमेरिका को इस युद्ध में ज़रूरत है पाकिस्तान की।
ईरान और पाकिस्तान की सीमा आपस में लगती है, जो इस पूरे भू-राजनीतिक समीकरण में पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से बेहद अहम बना देती है। अमेरिका को इस जंग में फॉरवर्ड लॉजिस्टिक बेस की ज़रूरत है—ऐसी जगह जहां से वह अपने फाइटर जेट्स में ईंधन भर सके, जासूसी मिशन चला सके और जरूरत पड़ने पर ईरान पर दबाव बना सके। पाकिस्तान इस ज़रूरत को पूरा करने वाला सबसे उपयुक्त विकल्प है।
इसीलिए अमेरिका में जनरल असीम मुनीर की अहमियत तेजी से बढ़ी है। Centcom के प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला ने हाल ही में पाकिस्तान को “आतंकवाद विरोधी अभियान में अभूतपूर्व साझेदार” बताया है और आईएसआईएस-खोरासान के खिलाफ पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने यह बात अमेरिकी कांग्रेस में कही—वह भी ऐसे वक्त में जब भारत, पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने के लिए लगातार लॉबिंग कर रहा है।
पर अब भारत की यह कूटनीतिक कोशिश एक नई चुनौती से जूझ रही है। क्योंकि अगर ईरान पर हमला होता है, तो अमेरिका को पाकिस्तान का साथ चाहिए—हर हाल में। इससे भारत के लिए स्थिति कठिन हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तान को मिलने वाला यह समर्थन उसे दोबारा पश्चिमी खेमे में एक अहम रणनीतिक मोहरे की तरह स्थापित कर देगा।
यह पूरी स्थिति एक ऐसे अदृश्य युद्ध की तरह है, जो अभी शुरू नहीं हुआ—but the countdown has begun. पर्दे के पीछे तैयार हो रही इस बड़ी भू-राजनीतिक बिसात में अब अगला मोहरा कौन बनेगा, यह दुनिया की सबसे बड़ी जंग तय कर सकती है।
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