May 4, 2026

ईरान-इजरायल तनाव फिर बढ़ा, ट्रंप ने दी चेतावनी, जानिए कितनी ताकतवर है ईरानी सेना

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता दिख रहा है। बीते साल मिसाइल हमलों के जरिए आमने-सामने आए ईरान और इजरायल के बीच युद्ध का खतरा भले टल गया हो, लेकिन अब हालात फिर से गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पड़ोसी अरब देशों से अपने कर्मचारियों को वापस बुला लिया है। उन्होंने कहा है कि यह क्षेत्र अब सुरक्षित नहीं रहा। यह बयान उस समय आया है जब इजरायल की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की आशंका जताई जा रही है।

इस पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि उसके पास सैकड़ों मिसाइलें हैं और अगर हमला हुआ, तो वह जोरदार जवाब देगा। ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका के पश्चिम एशिया में मौजूद सैन्य ठिकाने उसके निशाने पर होंगे। यह पहला मौका नहीं है जब ईरान ने अमेरिका और इजरायल को खुले तौर पर चुनौती दी है। सवाल उठता है कि आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के पास ऐसी कौन-सी सैन्य ताकत है, जिस पर भरोसा कर वह इन महाशक्तियों से टकराव की बात करता है?

प्रतिबंधों के बीच विकसित की सैन्य क्षमता
ईरान एक शिया बहुल देश है, जो पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आर्थिक अलगाव का सामना कर रहा है। इसके बावजूद उसने लगातार अपनी सैन्य क्षमताएं मजबूत की हैं। वैश्विक सैन्य शक्ति सूचकांकों में ईरान 145 देशों में 16वें स्थान पर है। सैन्य प्रदर्शन के मामले में उसने सऊदी अरब जैसे उच्च रक्षा बजट वाले देशों से भी बेहतर प्रदर्शन किया है।
देश में करीब 5 करोड़ युवा हैं, जो सैन्य सेवा के योग्य हैं—यह संख्या कनाडा की पूरी जनसंख्या से भी अधिक है। ईरान की सेना में कुल लगभग 12 लाख कर्मी हैं, जिनमें 6,10,000 सक्रिय सैनिक, 3,50,000 रिजर्व बल और 2,20,000 अर्धसैनिक बल शामिल हैं।

दोहरी सैन्य संरचना: आर्टेश और IRGC
ईरान की सेना दो प्रमुख हिस्सों में बंटी हुई है। पहला है “आर्टेश” यानी पारंपरिक सशस्त्र बल, और दूसरा “इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स” (IRGC)।

आर्टेश की जिम्मेदारी पारंपरिक राष्ट्रीय रक्षा, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की है। इसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना शामिल हैं, जिसमें कुल करीब 3.5 लाख सैनिक तैनात हैं।

IRGC एक वैचारिक बल है जो सीधे देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को रिपोर्ट करता है। इसके पास अपनी जमीन, समुद्री, एयरोस्पेस और विशेष बल इकाइयाँ हैं। IRGC की भूमिका सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि क्रांतिकारी विचारधारा की रक्षा और आंतरिक स्थिरता बनाए रखने की भी है।

बासिज बल से और मजबूत होता है सुरक्षा नेटवर्क
IRGC के तहत एक और बल है — बासिज प्रतिरोध बल, जो एक अर्धसैनिक स्वयंसेवी संगठन है। यह देश के विश्वविद्यालयों, मोहल्लों और कार्यस्थलों तक फैला हुआ है और सुरक्षा नेटवर्क को व्यापक बनाता है।

इस समग्र और जटिल सैन्य ढांचे के चलते ईरान की सुरक्षा व्यवस्था न केवल बाहरी हमलों से निपटने के लिए तैयार रहती है, बल्कि शासन की स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।

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