ऑनलाइन प्राइसिंग से तय होगी अब महंगाई, सरकार CPI में करेगी बड़ा बदलाव
महंगाई का अंदाजा अब देश में ऑनलाइन खरीदारी के ट्रेंड से लगाया जाएगा। सरकार ने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के कैलकुलेशन में बड़ा बदलाव करने की योजना बनाई है, जिसके तहत BlinkIt, Zepto और BigBasket जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स की कीमतों को भी शामिल किया जाएगा। अभी CPI एक तय बास्केट पर आधारित होता है, जिसमें ग्रॉसरी, टेलीफोन बिल, गैस-पेट्रोल आदि शामिल होते हैं। लेकिन अब बदलते कंज्यूमर बिहेवियर को ध्यान में रखते हुए सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी डेटा लेने की तैयारी में है।
यह डेटा देश के 12 बड़े शहरों से जुटाया जाएगा, जिनकी आबादी 25 लाख से ज्यादा है। यहां से सरकार सब्जी, फल, ग्रॉसरी जैसे सामानों की ऑनलाइन कीमतें इकट्ठा करेगी और इसे CPI का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे न सिर्फ शहरी महंगाई का बेहतर आकलन हो सकेगा, बल्कि यह ग्रामीण स्तर पर भी महंगाई का सटीक चित्र देगा।
ऑनलाइन डेटा कलेक्ट करने के लिए सरकार हर शहर में एक प्रमुख ऑनलाइन विक्रेता को चुनेगी। जैसे लखनऊ में चावल के लिए BigBasket से डेटा लिया जा सकता है, तो बेंगलुरू में Zepto या Amazon से। अभी सरकार कुल 2,295 मार्केट्स (1,181 ग्रामीण और 1,114 शहरी) से डेटा लेती है, लेकिन इस योजना के तहत यह संख्या 2,900 हो जाएगी।
नए CPI में मोबाइल, इंटरनेट, केबल टीवी, ओटीटी सब्सक्रिप्शन, हवाई और रेल टिकट जैसे खर्च भी शामिल हो सकते हैं। साथ ही, इसका बेस ईयर भी 2012 से बदलकर 2024 करने की तैयारी है। सरकार इस नए फॉर्मेट के अनुसार CPI डेटा को 2026 से जारी करना शुरू कर सकती है।
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