प्रमुख ब्याज दर में आगे कटौती की संभावना बेहद सीमित, RBI गवर्नर ने साफ किए संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 0.50 फीसदी की कटौती कर इसे 5.5 प्रतिशत पर ला दिया है, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि अब ब्याज दर में आगे और कमी की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है। द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद गवर्नर ने कहा कि अगली नीतिगत कार्रवाई पूरी तरह आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
रेपो रेट में ताजा कटौती के बाद RBI ने यह भी बताया कि फरवरी से अब तक कुल एक प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। मगर मौजूदा परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक अब और अधिक ढील देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई दर इस साल 3.7 फीसदी और अगले साल 4 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान है, ऐसे में अब नीतिगत दर को और नीचे लाने की बहुत कम संभावना है।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि रेपो रेट में कटौती से आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। इसका प्रभाव खासतौर पर वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में देखने को मिलेगा।
गवर्नर ने इस बार की दर कटौती को खास बताया क्योंकि उनका मानना है कि पिछले रुझानों के मुकाबले इस बार ग्राहकों तक इसका लाभ कहीं ज्यादा तेजी से पहुंचेगा। मल्होत्रा ने संकेत दिए कि आरबीआई ने महंगाई के खिलाफ जारी लड़ाई में काफी हद तक सफलता पाई है, जिससे यह कदम उठाया गया।
इस दौरान उन्होंने मौद्रिक नीति के रुख को ‘उदार’ से बदलकर ‘तटस्थ’ करने की भी घोषणा की। इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में नीतिगत दरें ऊपर या नीचे, दोनों ही दिशाओं में जा सकती हैं – यह पूरी तरह आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। यदि विकास दर कमजोर पड़ती है, तो दर में और कटौती संभव हो सकती है, जबकि मजबूत विकास और बढ़ती महंगाई की स्थिति में दरें बढ़ भी सकती हैं।
RBI की यह रणनीति दर्शाती है कि बैंक भविष्य की नीतियों को लेकर बेहद सतर्क और आंकड़ा-आधारित दृष्टिकोण अपनाने जा रहा है, जिससे मौद्रिक स्थिरता बनी रह सके और आर्थिक विकास को भी समर्थन मिलता रहे।
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