इजराइल ने गाजा युद्ध, वैश्विक आलोचना और कूटनीतिक दबावों के बावजूद 2024 में रक्षा निर्यात के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बना लिया है।
इजराइल ने गाजा युद्ध, वैश्विक आलोचना और कूटनीतिक दबावों के बावजूद 2024 में रक्षा निर्यात के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बना लिया है। देश ने 14.8 अरब डॉलर के हथियार बेचकर यूरोप और एशिया में अपनी पकड़ और मजबूत की है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते जहां रूस के हथियार निर्यात में भारी गिरावट आई है, वहीं इजराइल की डिफेंस टेक्नोलॉजी की मांग दुनियाभर में तेजी से बढ़ी है। रूस जहां युद्ध में उलझ कर अपने हथियार निर्यात में 92% की गिरावट झेल रहा है, वहीं इजराइल की टेक्नोलॉजी को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने हाथों-हाथ लिया है।
इजराइल के रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में जहां डिफेंस एक्सपोर्ट 13 अरब डॉलर थे, वहीं 2024 में यह बढ़कर 14.8 अरब डॉलर हो गए। यूरोप इजराइल के हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है, जहां 54% हथियार बिक्री इसी क्षेत्र को हुई। जर्मनी के साथ Arrow-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की 3.8 अरब डॉलर की डील इजराइल की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील साबित हुई है। यूरोपीय देशों ने रूस से दूरी बनाकर इजराइल से अपने रक्षा संबंध मजबूत किए हैं।
एशियाई देशों में भी इजराइल की डिमांड तेजी से बढ़ी है। भारत ने 2020 से 2024 के बीच अपने कुल हथियार आयात का 13% हिस्सा इजराइल से खरीदा, जबकि फिलीपींस ने 27% हथियार इजराइली कंपनियों से मंगवाए। अरब देशों में भी इजराइली हथियारों की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है—2023 में जहां यह हिस्सा 3% था, वहीं 2024 में 12% तक पहुंच गया। मोरक्को जैसे देश Elbit के हॉविट्ज़र, PULS सिस्टम और सैटेलाइट तक खरीद चुके हैं।
इजराइली हथियारों में सबसे ज्यादा मांग मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और रॉकेट्स की रही, जो कुल निर्यात का 48% रहे। इसके अलावा बख्तरबंद वाहन, मानवयुक्त विमान, साइबर सुरक्षा, इंटेलिजेंस सिस्टम और ड्रोन की भी अच्छी बिक्री हुई। वैश्विक डिफेंस मार्केट में भले ही इजराइल की हिस्सेदारी 3.1% रही हो, लेकिन उसकी वार्षिक वृद्धि दर ने दुनिया के कई बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। इस तेजी से इजराइल ने साबित कर दिया है कि युद्ध की चुनौतियों के बीच भी रणनीतिक तकनीक से बड़ा लाभ कमाया जा सकता है।
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