डेब्यू से पहले लगी ‘पनौती’ की मुहर, फिर मिथुन चक्रवर्ती बने मसीहा – शिल्पा शिरोडकर की कहानी पर्दे के पीछे की वो सच्चाई है, जो कम ही लोगों को पता है
बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही मुश्किल और रहस्यमयी भी है। एक वक्त था जब 90 के दशक की पॉपुलर एक्ट्रेस शिल्पा शिरोडकर को इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले ही ‘पनौती’ का टैग दे दिया गया था। फिल्में उनके नाम होते ही बंद होने लगी थीं। लोग उनके पीछे फुसफुसाकर कहते—”इस लड़की के साथ कुछ तो गड़बड़ है। जहाँ जाती है, प्रोजेक्ट रुक जाता है।” लेकिन किस्मत ने तब पलटी मारी, जब एक सुपरस्टार ने उनका हाथ थामा और उन्हें अंधेरे से रोशनी की ओर ले गया। वही सुपरस्टार थे मिथुन चक्रवर्ती।
हाल ही में ज़ूम टीवी को दिए एक एक्सक्लूसिव हाउस टूर इंटरव्यू में शिल्पा ने अपने करियर के शुरुआती दौर की वो अनकही कहानियां साझा कीं, जिन्हें सुनकर यकीन करना मुश्किल है। मुंबई स्थित अपने आलीशान घर में उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ‘सौतन की बेटी’ और ‘जंगल’ जैसी दो बड़ी फिल्मों के लिए साइन किया था, लेकिन दोनों ही फिल्में बिना रिलीज़ हुए बंद हो गईं। इससे इंडस्ट्री में उनके लिए नकारात्मक माहौल बनने लगा। शिल्पा कहती हैं, “मैंने तब सुना कि लोग मुझे ‘पनौती’ कहने लगे थे। कहते थे कि जब भी ये लड़की किसी फिल्म में आती है, प्रोजेक्ट बंद हो जाता है।”
लेकिन इसी अंधकार में उम्मीद की एक किरण बनकर आए मिथुन चक्रवर्ती। उन्होंने न सिर्फ शिल्पा को समझा, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी लौटाया। मिथुन के ही कहने पर उन्हें रमेश सिप्पी की साल 1989 में आई फिल्म ‘भ्रष्टाचार’ में एक अंधी लड़की की दमदार भूमिका मिली। इस फिल्म में रेखा, अनुपम खेर और रजनीकांत जैसे दिग्गज भी जुड़े थे। यह शिल्पा का डेब्यू प्रोजेक्ट बना, जिसने उन्हें एक झटके में चर्चा में ला दिया। खासकर फिल्म में फिल्माए गए रेप सीन और गाने ने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई। शिल्पा कहती हैं, “भ्रष्टाचार में मैंने जो किरदार निभाया, वह बोल्ड था। रेप सीन के बावजूद मैंने इसे सम्मानजनक तरीके से निभाया और खुद को साबित किया। मैं आज जो कुछ भी हूं, वो मौका भगवान ने मुझे दिया था – और उसमें मिथुन दा, रेखा जी और रमेश सिप्पी सर की बड़ी भूमिका थी।”
इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती के साथ शिल्पा ने पूरे 9 फिल्मों में काम किया, जिनमें से कई हिट साबित हुईं। मिथुन न केवल उनके करियर बल्कि उनके आत्मविश्वास के पुनर्निर्माण में भी मसीहा बनकर आए। शिल्पा के मुताबिक, अगर वो ‘भ्रष्टाचार’ फिल्म उन्हें नहीं मिलती, तो शायद वो कभी फिल्मों में टिक नहीं पातीं।
आज जब शिल्पा एक बार फिर बिग बॉस-18 के जरिए वापसी कर चुकी हैं और फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं, तब उनके संघर्ष की यह कहानी उन तमाम नए कलाकारों के लिए एक मिसाल बन सकती है, जो शुरुआती रिजेक्शन से टूट जाते हैं। शिल्पा शिरोडकर की ये कहानी बताती है कि एक ‘पनौती’ कहलाई गई लड़की कैसे अपने हौसले, किस्मत और सही मार्गदर्शन की बदौलत एक चमकता सितारा बन गई।
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