April 23, 2026

हॉस्टल की दीवारों में छिपा था दरिंदगी का राज: देहरादून में ऑटिस्टिक बच्चों से हैवानियत का पर्दाफाश

देहरादून के एक निजी बोर्डिंग स्कूल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यहां एक हॉस्टल कर्मचारी ने दो ऑटिस्टिक बच्चों के साथ न केवल कुकर्म किया, बल्कि उन्हें सिगरेट से जलाकर डराया और चुप रहने के लिए मजबूर करता रहा। यह भयावह सच तब सामने आया जब बच्चों की मां उनसे मिलने पहुंची और उनकी चुप्पी आंसुओं में टूट गई।

हॉस्टल में छिपी दरिंदगी

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक बोर्डिंग स्कूल में दो ऑटिस्टिक बच्चों के साथ लंबे समय से शारीरिक और मानसिक शोषण किया जा रहा था। आरोपी ने 9 और 13 वर्षीय दोनों भाइयों को सिगरेट से जलाया, उनके साथ मारपीट की और कुकर्म किया। यह खुलासा शुक्रवार को हुआ, जब बच्चों की मां उनसे मिलने पहुंची। मां उन्हें अपने एक दोस्त के ऑफिस ले गई, जहां बच्चों ने फूट-फूटकर अपने साथ हो रही दरिंदगी की पूरी कहानी बताई।

पीड़ित मासूम थे मुरादाबाद से

बच्चे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से हैं। अप्रैल महीने में उनकी मां उन्हें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए देहरादून के एक रेजिडेंशियल स्कूल में दाखिल करवाने आई थीं। लेकिन उन्हें यह अंदाज़ा नहीं था कि उनके बच्चे एक ऐसे शोषण भरे माहौल में पहुंच चुके हैं, जहां डर और दर्द उनका रोज़मर्रा का हिस्सा बन जाएगा।

आरोपी गाजीपुर का, स्कूल दिल्ली के ट्रस्ट का

पुलिस जांच में सामने आया कि स्कूल को एक दिल्ली-स्थित ट्रस्ट चला रहा था, लेकिन इसकी कोई सूचना स्थानीय प्रशासन को नहीं दी गई थी। स्कूल की प्रभारी महिला के पास न तो परमिट था और न ही आवासीय सुविधा संचालन की अनुमति। यह महिला स्कूल से कुछ किलोमीटर दूर एक प्रीप स्कूल भी चला रही थी, जहां 15 बच्चे पढ़ते हैं और उनमें से चार हॉस्टल में रहते थे।

आरोपी की पहचान 29 वर्षीय मोनू पाल के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला है। उसे 16 मई को हॉस्टल में काम पर रखा गया था और तभी से वह मासूमों के साथ हैवानियत कर रहा था।

मां की शिकायत से खुली परतें

मां की शिकायत पर पुलिस तुरंत हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। देहरादून के एसपी प्रमोद कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (2) (बलात्कार), 115 (2) (चोट पहुंचाने की नीयत) और पोक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

बाल कल्याण समिति और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की मदद से पुलिस ने बच्चों के बयान दर्ज किए हैं और स्कूल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी जब्त कर ली है।

हॉस्टल की भयावह सच्चाई

एससीपीसीआर की अध्यक्ष गीता खन्ना ने बताया कि आरोपी जिस कमरे में रहता था, वहीं चार ऑटिस्टिक बच्चे भी रहते थे। ये सभी बच्चे एक-दूसरे से डरते थे और कोई भी अपने दर्द की कहानी किसी को नहीं बता सका। जांच में यह भी पता चला है कि स्कूल और हॉस्टल बिना किसी वैध अनुमति के चल रहे थे और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं थी।

जिम्मेदार कौन?

अब बड़ा सवाल उठता है – जब बच्चों को सुरक्षित माहौल देने की जिम्मेदारी स्कूल और प्रशासन की होती है, तो एक बिना अनुमति का हॉस्टल कैसे चल रहा था? और जिन बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत थी, उन्हें एक असामाजिक तत्व के हवाले कैसे कर दिया गया?

यह मामला न केवल एक भयावह अपराध की तस्वीर पेश करता है, बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही को भी उजागर करता है। जांच जारी है, लेकिन कई सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं।

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