राजेश खन्ना: बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार का वो दौर, जब चाय भी चांदी की ट्रे में आती थी
बॉलीवुड के इतिहास में अगर किसी एक्टर को “पहला सुपरस्टार” कहा गया, तो वो हैं राजेश खन्ना। उनका स्टारडम 60 और 70 के दशक में इस कदर सिर चढ़कर बोला कि लाखों लड़कियां उनके पोस्टर्स से शादी करती थीं और लोग उनकी झलक पाने के लिए घंटों इंतज़ार करते थे।
राजेश खन्ना का करियर 1966 में चेतन आनंद की फिल्म ‘आखिरी खत’ से शुरू हुआ था। हालांकि ये फिल्म उस वक्त ज्यादा सफल नहीं रही, पर बाद में इसे कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला। इसके बाद जो हुआ, उसने बॉलीवुड के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया।
3 साल में 17 ब्लॉकबस्टर
राजेश खन्ना ने महज तीन सालों में लगातार 17 सुपरहिट फिल्में दीं—जो आज तक कोई दूसरा अभिनेता नहीं कर पाया। ये फिल्में थीं ‘राज’ (1967), ‘औरत’ (1967), ‘बहारों के सपने’ (1967), ‘इत्तेफाक’ (1969), ‘डोली’ (1970) और ऐसी ही कई हिट्स।
उनके प्रशंसकों की दीवानगी इतनी थी कि लोग उनकी कार की धूल तक को माथे पर लगाते थे। थिएटर्स में जब उनकी फिल्में चलतीं, तो सीटें हफ्तों पहले बुक हो जाती थीं।
स्टारडम का वो आलम: चांदी की ट्रे में चाय
राजेश खन्ना का स्टारडम सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था, उनके रहन-सहन में भी ये साफ दिखता था। मशहूर अदाकारा मौसमी चटर्जी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि सेट पर राजेश खन्ना के लिए चांदी की ट्रे में चाय लाई जाती थी। वो उस दौर में ऐसे स्टार थे जिनकी हर चीज़ ‘रॉयल’ होती थी—बात चाहे वैनिटी वैन की हो, कपड़ों की या फिर खाने-पीने की।
एक ऐसा रिकॉर्ड जो आज तक नहीं टूटा
राजेश खन्ना के नाम वो रिकॉर्ड दर्ज है जो आज की सोशल मीडिया और मार्केटिंग वाली दुनिया में भी कोई नहीं तोड़ पाया—लगातार 17 सुपरहिट फिल्में। उन्होंने अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, शर्मिला टैगोर, मुमताज और मौसमी चटर्जी जैसे तमाम बड़े सितारों के साथ काम किया।
आज जब बॉलीवुड के सुपरस्टार्स की बात होती है, तो राजेश खन्ना का नाम एक ऐसे अभिनेता के तौर पर लिया जाता है, जिनका करिश्मा हर दशक को प्रेरणा देता है। उनकी कहानियां महज़ किस्से नहीं, बल्कि उस दौर की धड़कन हैं—जब सुपरस्टार सिर्फ पर्दे पर नहीं, लोगों के दिलों में जिंदा रहते थे।
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