April 30, 2026

सोने की होड़ में क्यों कूद पड़े भारत-चीन जैसे देश? रिजर्व बढ़ाने की दौड़ तेज, बना नया रिकॉर्ड

एक दौर था जब देश अपनी करेंसी मजबूत करने के लिए डॉलर इकट्ठा करते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। भारत से लेकर चीन तक – दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब सोने को अपना नया कवच बना रही हैं। आखिर क्यों?

भारतीय रिजर्व बैंक की 31 मार्च 2025 की सालाना रिपोर्ट ने बाजार की निगाहें अपनी ओर खींच ली हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का गोल्ड रिजर्व अब 879.58 टन पर पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 57.58 टन ज्यादा है। इतना ही नहीं, इस गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी 57% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

पर भारत अकेला नहीं है इस रणनीति में। चीन की PBoC यानी पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार चौथे महीने गोल्ड खरीदा है। फरवरी 2025 में अकेले 5 टन सोना खरीदा गया, और सिर्फ जनवरी-फरवरी में ही 10 टन गोल्ड उनके भंडार में जुड़ चुका है। अब चीन के पास कुल 2,290 टन से ज़्यादा गोल्ड रिजर्व है, जो उनके विदेशी मुद्रा भंडार का 6% हिस्सा बन चुका है।

दुनिया के सबसे अमीर गोल्ड बैंक कौन?
इस गोल्ड रेस में अमेरिका सबसे आगे है, जिसके पास 8,133.5 टन से अधिक सोना है। वहीं जर्मनी के पास भी करीब 3,500 टन का भंडार है। इसके बाद इटली, फ्रांस, रूस और भारत जैसे देश आते हैं, जिन्होंने बीते सालों में अपने गोल्ड रिजर्व को लगातार बढ़ाया है।

क्यों कर रहे हैं देश गोल्ड में इन्वेस्टमेंट?
गोल्ड को हमेशा से “सुरक्षित निवेश” यानी सेफ हेवन एसेट माना जाता है। जब शेयर बाजार, करेंसी या वैश्विक व्यापार संकट में होते हैं, तो सोने की चमक और बढ़ जाती है।

ग्लोबल अनिश्चितता, जैसे युद्ध, आर्थिक मंदी या राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में देशों को ऐसी संपत्ति चाहिए होती है जो समय के साथ स्थिर और भरोसेमंद हो।

सोना वो संपत्ति है जो भले ही कुछ समय के लिए नीचे जाए, लेकिन लंबी अवधि में सकारात्मक रिटर्न ही देता है।

इसके अलावा गोल्ड की वैल्यू करेंसी की तुलना में ज्यादा स्थायी मानी जाती है, और यही वजह है कि अब देशों की आर्थिक रणनीति में इसका महत्व और बढ़ गया है।

भारत की रणनीति क्या कहती है?
RBI का गोल्ड खरीदना इस बात का संकेत है कि देश अपनी फॉरेक्स रिजर्व पॉलिसी को और सुरक्षित व स्थिर बनाना चाहता है। डॉलर और अन्य करेंसीज़ की तुलना में गोल्ड का अधिक हिस्सा इकोनॉमी को झटकों से बेहतर बचा सकता है।

क्या इससे आम आदमी को फर्क पड़ेगा?
सीधे तौर पर नहीं, लेकिन देश के गोल्ड रिजर्व की मज़बूती देश की आर्थिक विश्वसनीयता को बढ़ाती है, जिससे रुपया स्थिर रहता है, महंगाई पर कंट्रोल बेहतर होता है, और अंतरराष्ट्रीय संकटों में देश को मजबूती मिलती है।

तो आने वाले समय में गोल्ड सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश की आर्थिक सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है – और यह रेस अभी लंबी चलेगी।

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