आगरा पनवारी कांड: 36 दोषी, 15 बरी, 27 की मौत – अदालत ने सुनाया फैसला
21 जून 1990 को आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के पनवारी गांव में हुई जातीय हिंसा के मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। इस पनवारी कांड में कुल 100 आरोपियों में से 36 को दोषी पाया गया है, जबकि 15 आरोपियों को बरी किया गया है। 27 अन्य आरोपियों की पहले ही मौत हो चुकी है।
पनवारी कांड की शुरुआत तब हुई जब चोखेलाल जाटव की बेटी मुंद्रा की बारात जाट समुदाय के इलाके में चढ़त करने गई, लेकिन जाटों ने बारात रुकवा दी। इसके बाद हुई पुलिस और भीड़ की झड़प में गोली लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जिससे आगरा में बड़े स्तर पर जातीय दंगे भड़क गए। पूरे शहर में 10 दिनों तक कर्फ्यू लगा था, और स्थिति नियंत्रण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आगरा आना पड़ा था।
इस मामले में सिकंदरा थाना पुलिस ने 6000 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें फतेहपुर सीकरी के विधायक चौधरी बाबूलाल का भी नाम आया था। अदालत ने जिन दोषियों को दोषी पाया है, उनमें एक 115 साल का बुजुर्ग भी शामिल है। कोर्ट ने तीन आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
पनवारी कांड आज भी आगरा के इतिहास में जातीय तनाव की एक कड़ी मिसाल बना हुआ है।
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