April 21, 2026

एक बार फिर लौट रहा है कोरोना… क्या देश फिर खतरनाक दौर की ओर बढ़ रहा है?”

29 मई 2025 की सुबह जब देश राजनीति और सुरक्षा मसलों में व्यस्त था, एक चुपचाप डर फिर से सर उठाने लगा—कोरोना वायरस। हेडलाइनों से दूर, लेकिन मेडिकल बुलेटिन्स में लगातार उभरते हुए आंकड़ों ने चिंता की लकीरें गहरा दीं।

भारत में एक बार फिर कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में एक्टिव केसों की संख्या 1252 हो चुकी है और अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा एक्टिव केस केरल (430) और महाराष्ट्र (325) में सामने आए हैं, जहां अकेले मुंबई में ही 316 मरीज कोविड पॉजिटिव पाए गए।

खास बात यह है कि ये संक्रमण केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि लोगों की जान लेकर जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति की चंडीगढ़ में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह पंजाब के लुधियाना में काम करता था और सांस की तकलीफ के बाद उसे चंडीगढ़ रेफर किया गया था, जहां उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई।

महाराष्ट्र के ठाणे में भी एक महिला और 21 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत हुई। इससे पहले 17 मई को बेंगलुरु में 84 वर्षीय बुजुर्ग की मौत मल्टी ऑर्गन फेल्योर से हुई थी, लेकिन 24 मई को आई रिपोर्ट में वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया।

राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और मध्यप्रदेश में भी कुल मिलाकर 11 मरीजों की मौतें कोविड से जुड़ी हुई मानी जा रही हैं। 26 मई को जयपुर में एक युवक रेलवे स्टेशन पर मृत मिला, जिसकी बाद में कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर
29-30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूपी और बिहार दौरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। निर्देश दिया गया है कि पीएम मोदी के 100 मीटर के दायरे में रहने वाले सभी लोगों की कोरोना जांच की जाएगी।

नए वैरिएंट्स की दस्तक
ICMR के डायरेक्टर डॉ. राजीव बहल ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत से लिए गए सैंपल्स की जिनोम सीक्वेंसिंग में चार नए वैरिएंट मिले हैं—LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1। फिलहाल JN.1 भारत में सबसे आम वैरिएंट है और टेस्टिंग में यह 50% से अधिक मामलों में पाया गया है। इसके अलावा BA.2 और ओमिक्रॉन सबलाइनेज भी देखे गए हैं।

WHO की चेतावनी सीमित, लेकिन नजर बनाए रखने की सलाह
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इन वैरिएंट्स को ‘चिंताजनक’ नहीं माना है, लेकिन इन्हें ‘निगरानी में रखने योग्य’ श्रेणी में रखा है। चीन समेत कई एशियाई देशों में भी इन्हीं वैरिएंट्स का प्रभाव देखा जा रहा है।

क्या करें?
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति गंभीर नहीं है, फिर भी लोगों को सतर्क रहने की ज़रूरत है। बुजुर्गों, पहले से बीमार लोगों और बच्चों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

सवाल अब यह है कि क्या हम फिर से उसी खतरनाक दौर की ओर लौट रहे हैं, जहां हर खांसी, हर बुखार, एक डर की आहट लगती थी? या यह सिर्फ एक हल्की दस्तक है, जिसे सजग रहकर टाल सकते हैं? जवाब शायद आने वाले कुछ हफ्तों में ही साफ हो सकेगा।

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