अच्छी भावना नहीं दिखाने वाले देशों पर फिर लागू होगा बढ़ा हुआ टैरिफ: अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो देश टैरिफ रेट को लेकर सकारात्मक रवैया नहीं दिखाएंगे या अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते पर हो रही वार्ताओं को जानबूझकर टालेंगे, उन पर फिर से 2 अप्रैल को लागू किया गया पुराना टैरिफ प्रभावी कर दिया जाएगा। यह चेतावनी उन सभी देशों के लिए है जो वर्तमान में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों पर बातचीत कर रहे हैं या टैरिफ के मसले पर सहयोग नहीं दिखा रहे।

बता दें कि 2 अप्रैल को जो टैरिफ लागू किया गया था, वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी वस्तुओं के आयात पर लगाया गया था, जिसमें भारत समेत दुनिया के कई प्रमुख देश शामिल थे। यह टैरिफ दरें काफी ऊंची थीं और व्यापारिक दृष्टिकोण से कई देशों के लिए चिंता का विषय बनी थीं। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती और मंदी की संभावनाओं के कारण अमेरिका ने 9 अप्रैल को इन शुल्कों को अस्थायी रूप से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था।

वित्त मंत्री बेसेंट ने आगे कहा कि यह रियायती शुल्क दर केवल 90 दिनों तक ही लागू रहेगी और यह अमेरिका की एक रणनीतिक पहल है ताकि बाकी देश अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को कम करें। इस 90 दिनों की अवधि को अमेरिका ‘सकारात्मक व्यापार संबंधों की परीक्षा अवधि’ के रूप में देख रहा है। इस दौरान अमेरिका उम्मीद कर रहा है कि व्यापार करने वाले देश उसकी ओर सकारात्मक रुख दिखाएंगे और अपने-अपने स्तर पर टैरिफ में कटौती कर सहयोग जताएंगे। यदि ऐसा नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से कड़े कदम उठाने को तैयार है।

भारत समेत कई देशों ने इस चेतावनी के बाद अमेरिका के साथ वार्ता शुरू कर दी है ताकि दोनों पक्षों के बीच पारस्परिक समझ बन सके और शुल्क विवाद को सुलझाया जा सके। इस दिशा में अमेरिका और चीन के बीच पहले ही सहमति बन चुकी है। बेसेंट ने जानकारी दी कि बीते हफ्ते चीन के साथ हुई बातचीत के बाद एक नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने पर सहमति हुई है। इस समझौते के तहत अमेरिका अब चीनी वस्तुओं पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, जबकि चीन अमेरिकी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाएगा। यह समझौता इस बात का संकेत है कि अमेरिका व्यापार संतुलन को बनाए रखने के लिए सख्त लेकिन लचीली रणनीति अपना रहा है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल देखी जा रही है। कई देशों के आर्थिक विशेषज्ञ इसे एक निर्णायक मोड़ के रूप में देख रहे हैं, जहां वैश्विक व्यापार प्रणाली में अमेरिका की शर्तें और नीतियां फिर से प्रभावशाली भूमिका निभाने लगी हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य देश इस चेतावनी पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और क्या कोई व्यापक वैश्विक टैरिफ समझौता सामने आता है या व्यापार युद्ध की आशंकाएं फिर से गहराती हैं।

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