April 18, 2026

क्या आप जिम में कर रहे हैं फिटनेस की तैयारी या मेंटल हेल्थ को न्योता दे रहे हैं बीमारी का?

AIIMS की रिसर्च ने खोली चौंकाने वाली सच्चाई — युवाओं की एक गलती बन रही मानसिक तबाही की वजह अगर आप भी जिम में घंटों पसीना बहाकर मसल्स बना रहे हैं और खुद को फिट समझ रहे हैं, तो ज़रा ठहरिए — कहीं आप खुद ही अपनी दिमागी सेहत को खतरे में तो नहीं डाल रहे? लेटेस्ट मेडिकल रिसर्च और एक्सपर्ट रिपोर्ट्स इस ओर इशारा कर रही हैं कि आज के यंगस्टर्स, जो फिटनेस की होड़ में सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं, वे ना सिर्फ अपने शरीर बल्कि दिमाग को भी बर्बादी की तरफ धकेल रहे हैं।

AIIMS की एक हालिया रिसर्च में सामने आया है कि जबरदस्त स्टैमिना और मसल्स बनाने के लिए जो दवाएं और सप्लीमेंट्स युवा ले रहे हैं, उनका सीधा असर उनकी मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा है। आंकड़े डराने वाले हैं — इन दवाओं का सेवन करने वाले 58% युवा ‘यूफोरिया’ यानी असामान्य रूप से ज्यादा उत्साहित या खुश रहने की स्थिति में चले जाते हैं, जबकि 68% युवाओं में साइकोटिक लक्षण दिखने लगते हैं — जैसे भ्रम, गुस्सा, चिड़चिड़ापन और अंततः मानसिक असंतुलन। ये लक्षण धीरे-धीरे नेगेटिव इमोशंस में बदलते हैं और व्यक्ति को डिप्रेशन, एंग्जायटी और ब्रेन डिसफंक्शन की ओर ले जाते हैं।

बात यहीं खत्म नहीं होती। सप्लीमेंट्स का साइड इफेक्ट सिर्फ दिमाग पर नहीं, दिल पर भी होता है। ये दवाएं हार्ट को असामान्य रूप से तेज़ी से पंप करने लगती हैं जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण कई बार ब्रेन हैमरेज तक की नौबत आ जाती है — यानी दिमाग की नसें फट सकती हैं।

और अब इन सब पर कुदरत का कहर — गर्मी का असर
आज की तपती गर्मी में हमारे शरीर पर बाहरी असर और भी गंभीर हो चुका है। धूल और प्रदूषण के महीन कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर खून में घुलते हैं और उसे गाढ़ा बना देते हैं। इससे ब्लड फ्लो में रुकावट आती है और नतीजा — ब्रेन स्ट्रोक।

डिहाइड्रेशन एक और बड़ा खतरा बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे दिमाग का 80% हिस्सा पानी से बना होता है और यह शरीर की कुल ऑक्सीजन का 20% हिस्सा अकेले उपयोग करता है। जब शरीर में पानी और ऑक्सीजन की कमी होती है, तो दिमाग का कामकाज प्रभावित होता है। परिणामस्वरूप — स्मृति दोष, एकाग्रता में कमी, मानसिक थकान और कई बार बेहोशी तक।

तो फिर क्या करें? इसका समाधान क्या है?

विशेषज्ञों का सुझाव है — योग और प्राणायाम ही इसका सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प हैं। नियमित योग से न केवल दिमागी संतुलन बना रहता है, बल्कि शरीर भी संपूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है। लेकिन शर्त एक है — कंसिस्टेंसी। एक दिन योग और दो दिन ब्रेक — यह तरीका काम नहीं करेगा। हर दिन एक तय समय पर, पूरी निष्ठा से योग और ध्यान करना होगा।

निष्कर्ष में यही कहा जा सकता है कि अगर आप वाकई में फिट रहना चाहते हैं, तो शरीर के साथ-साथ दिमाग की सेहत को भी प्राथमिकता दें। सप्लीमेंट्स से दूरी बनाएं, प्राकृतिक आहार अपनाएं, योग को जीवनशैली में शामिल करें, और गर्मी से खुद को बचाकर रखें।

क्योंकि मसल्स बना लेना आसान है, लेकिन एक बार बिगड़ी मानसिक सेहत को संभालना बेहद मुश्किल।

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