शेयर बाजार ने मचाई धूम, लेकिन सोना धड़ाम! 10 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट से दंग हुए निवेशक
जहां एक ओर शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई, वहीं दूसरी ओर सोने ने निवेशकों को तगड़ा झटका दे दिया। सोमवार को सोने की कीमतों में 3400 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 10 महीनों में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों के बीच हलचल तेज हो गई है, क्योंकि ऐसा लंबे समय बाद हुआ है जब शेयर बाजार की चमक में सोने की चमक फीकी पड़ गई हो।
क्यों टूटा सोने का भाव?
इस गिरावट के पीछे भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर बनी सहमति और अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के सुलझने की उम्मीदें मुख्य वजह मानी जा रही हैं। इससे वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव में राहत मिली और निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश (जैसे सोना) से हटकर शेयर बाजार की ओर हो गया।
सोने की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट
सोमवार को 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 3400 रुपये टूटकर 96,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
शनिवार को यही सोना 99,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
23 जुलाई 2024 के बाद यह सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है, जब सोने में 3,350 रुपये की गिरावट आई थी।
99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी गिरकर 96,550 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है।
चांदी की चमक भी हुई फीकी
चांदी की कीमतें भी शनिवार के मुकाबले 200 रुपये गिरकर 99,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं।
एमसीएक्स पर जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2,295 रुपये यानी 2.37% गिरकर 94,434 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाजिर चांदी 1.19 प्रतिशत गिरकर 32.33 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज की गई।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट कमोडिटीज राहुल कलंत्री के अनुसार, ट्रेड वॉर में नरमी और सीजफायर की खबरों ने सोने की मांग को प्रभावित किया है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी) जतिन त्रिवेदी ने कहा, “रूस-यूक्रेन संघर्ष में भी शांति के संकेत मिले हैं। ऐसे में निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे सोना टूट गया।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि शेयर बाजार में जोरदार तेजी से सोने की “सेफ हेवन” वाली भूमिका कमजोर हो गई है।
शेयर बाजार ने दी उड़ान
सोने की गिरावट का दूसरा पहलू शेयर बाजार की शानदार तेजी भी है।
सेंसेक्स में करीब 3000 अंकों की छलांग देखी गई।
यह तेजी भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव में कमी और वैश्विक अनिश्चितता के हल होने से आई सकारात्मकता का परिणाम है।
सोने की यह बड़ी गिरावट निवेशकों के लिए एक बड़ा अलार्म है कि बाजार के रुख के साथ रणनीति बदलनी होगी। फिलहाल स्थिति यही कहती है कि अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए मुफीद हो सकता है। लेकिन बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए हर कदम सोच-समझकर उठाना जरूरी है।
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