April 28, 2026

मिसकैरेज के बढ़ते मामले: जानिए मुख्य कारण और शुरुआती लक्षण, डॉक्टरों की चेतावनी से रहें सतर्क

मां बनना हर महिला के लिए एक अनमोल अनुभव होता है, लेकिन कई बार यह सफर बेहद चुनौतीपूर्ण भी बन जाता है। प्रेगनेंसी के शुरुआती तीन महीने सबसे ज्यादा नाजुक माने जाते हैं और इसी दौरान मिसकैरेज की आशंका भी सबसे अधिक होती है। विशेषज्ञों की मानें तो गर्भपात के पीछे महिलाओं की कुछ आदतें, बीमारियां और जीवनशैली अहम भूमिका निभाती हैं। यह स्थिति ना केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी मां को झकझोर कर रख देती है।

गाइनकॉलजिस्ट डॉ. मीरा बताती हैं कि प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर यानी तीन महीनों में भ्रूण का विकास तेजी से होता है और इस समय थोड़ी सी भी लापरवाही या शरीर में हो रहे बदलावों को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। कई बार महिलाओं को यह तक नहीं पता चलता कि वे मिसकैरेज की स्थिति में पहुंच रही हैं। यही वजह है कि सतर्क रहना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।

मिसकैरेज के पीछे कई कारण होते हैं। इसमें सबसे सामान्य कारणों में क्रोमोसोमल असामान्यता यानी भ्रूण में जेनेटिक खराबी, हार्मोनल असंतुलन, थायरॉयड या डायबिटीज जैसी बीमारियां, अत्यधिक मानसिक तनाव, भारी सामान उठाना, अत्यधिक शारीरिक परिश्रम, अनियमित खानपान, धूम्रपान और शराब जैसी आदतें शामिल हैं। इसके अलावा संक्रमण या कोई पुरानी बीमारी भी गर्भपात का कारण बन सकती है।

डॉ. मीरा के अनुसार, अगर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान तेज पेट दर्द, रक्तस्राव, कमजोरी, चक्कर आना या तेज बुखार जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये शुरुआती संकेत हो सकते हैं कि कुछ ठीक नहीं चल रहा है। समय रहते ध्यान दिया जाए तो मिसकैरेज से बचा जा सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाओं को शुरुआत से ही अपने खानपान, नींद, मानसिक स्वास्थ्य और नियमित जांचों पर पूरा ध्यान देना चाहिए। किसी भी तरह की परेशानी को नजरअंदाज ना करें और हर हफ्ते डॉक्टर की सलाह जरूर लें। जानकारी और सतर्कता ही गर्भपात जैसे दुखद अनुभव से बचा सकती है।

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