अमेरिकी टैरिफ के बीच सैमसंग समेत कई दिग्गज कंपनियां भारत में शिफ्टिंग की तैयारी में
वियतनाम पर अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के चलते वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इस बदलते माहौल में दक्षिण कोरियाई टेक दिग्गज सैमसंग अब अपने स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स के मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित करने की संभावनाएं तलाश रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि सैमसंग भारत में कई इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से बातचीत कर रही है। इनमें से कई फर्म पहले से ही सैमसंग के साथ काम कर चुकी हैं।
इस कदम के पीछे प्रमुख वजह अमेरिका की नई टैरिफ नीति मानी जा रही है। अमेरिका ने वियतनामी आयात पर 46 प्रतिशत और भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। हालांकि चीन को छोड़कर बाकी सभी देशों पर लगाए गए टैरिफ को अमेरिका ने 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है, लेकिन वियतनाम पर लागू टैरिफ को इससे कोई राहत नहीं मिली है। इससे वियतनाम में उत्पादन कर रही वैश्विक कंपनियों के लिए लागत में भारी इजाफा हुआ है, और वे अब वैकल्पिक उत्पादन स्थलों की तलाश में हैं। भारत इन विकल्पों में प्रमुख रूप से उभर रहा है।
सिर्फ सैमसंग ही नहीं, बल्कि गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक भी भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल अपने स्मार्टफोन ब्रांड पिक्सेल के कुछ प्रोडक्शन को वियतनाम से भारत में शिफ्ट करने को लेकर डिक्सन टेक्नोलॉजीज और फॉक्सकॉन जैसे कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के साथ बातचीत कर रही है। यह वही कंपनियां हैं जो पहले से भारत में अन्य ब्रांड्स के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइसेज असेंबल करती हैं।
सैमसंग के लिए वियतनाम अभी तक एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब रहा है। वर्ष 2024 में कंपनी ने वियतनाम से 52 बिलियन डॉलर मूल्य के मोबाइल फोन और स्पेयर पार्ट्स का निर्यात किया, जो वियतनाम के कुल व्यापार का 9 प्रतिशत था। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल वियतनाम का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 142 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि भारत का यह आंकड़ा 29.2 बिलियन डॉलर था। हालांकि, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार लाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) जैसी योजनाएं शुरू की हैं, जिससे यह देश वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।
इससे पहले, एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी भारत में प्रोडक्शन शुरू किया था और अब उनके आईफोन मॉडल्स भारत में ही असेंबल किए जा रहे हैं। अगर सैमसंग और गूगल जैसे बड़े खिलाड़ी भी भारत में बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करते हैं, तो यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में एक अहम भूमिका दिला सकता है।
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में भारत एशिया का अगला मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है, खासकर तब जब दुनिया अमेरिका-चीन टकराव और टैरिफ वॉर के चलते नए, स्थिर और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन की खोज में है। भारत की बड़ी जनसंख्या, सस्ते श्रम, सुधारवादी नीतियां और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था इसे इस रेस में आगे बढ़ने का मौका दे सकती है।
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