April 19, 2026

वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, ओवैसी और कांग्रेस ने उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से 7 दिन के भीतर जवाब देने का आदेश दिया है। इस दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस अवधि के दौरान केंद्रीय वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड में कोई भी नई नियुक्ति नहीं की जाएगी। वक्फ कानून के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें प्रमुख याचिका AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी द्वारा भी दायर की गई है। ओवैसी ने केंद्र सरकार पर वक्फ को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और इसे संघवाद के खिलाफ बताया।

ओवैसी का कहना है कि केंद्र सरकार वक्फ को कमजोर करने के लिए इस नए संशोधन को लेकर आई है। उनका आरोप है कि यह कानून वक्फ की जमीनों को नष्ट करने और इसका नियंत्रण छीनने के उद्देश्य से लाया गया है। ओवैसी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हम इस काले कानून के खिलाफ पूरी ताकत से खड़े हैं। हम AIMPLB के साथ इस संघर्ष को जारी रखेंगे। यह कानून वक्फ की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि उसे नष्ट करने के लिए लाया गया है।”

ओवैसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कानून संघवाद के ढांचे के खिलाफ है और इसे लागू करने से वक्फ की पूरी संरचना प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के खिलाफ उनकी पार्टी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दोनों मिलकर कानूनी और प्रदर्शन के माध्यम से संघर्ष करेंगे।

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट में सभी दलीलें रखी गई हैं, और अब अंतिम निर्णय अदालत का होगा। यदि नया कानून लागू भी होता है, तो सुप्रीम कोर्ट के पास उसे समीक्षा करने का पूरा अधिकार है। हमें अदालत का फैसला मंजूर होगा, चाहे वह हमारे पक्ष में हो या नहीं।” सलमान खुर्शीद का यह बयान इस बात को इंगीत करता है कि कांग्रेस कानून के मुद्दे पर कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी, चाहे वह किसी भी दिशा में जाए।

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन शामिल थे, ने इस मामले की सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कुछ और समय की मांग की ताकि वह जवाब तैयार कर सकें। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को 7 दिन का समय दिया और इस दौरान कोई नई नियुक्ति न करने का आदेश दिया।

यह मामला भारतीय वक्फ संशोधन अधिनियम, 2019 से जुड़ा हुआ है, जो केंद्र सरकार द्वारा लाया गया था। इस अधिनियम में कई नए संशोधन किए गए थे, जिनका विरोध मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों द्वारा किया जा रहा है। इन संशोधनों में वक्फ बोर्ड के नियंत्रण को केंद्रीयकरण की ओर बढ़ाने और वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन के तरीके में बदलाव की कोशिश की गई है। इस कानून के खिलाफ कई मुस्लिम संगठन और नेता इसे वक्फ की स्वतंत्रता और संघीय ढांचे के खिलाफ मानते हैं।

इस प्रकार, वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई इस समय प्रमुख न्यायिक गतिविधि है, जो न केवल वक्फ की स्थिति को प्रभावित कर सकती है, बल्कि भारतीय संविधान और संघीय ढांचे पर भी इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

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