April 20, 2026

दुनिया के कई देशों में भूकंप के झटके, चिली और म्यांमार में लोग डरे-सहमे

हाल के समय में दुनिया के कई देशों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई है। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने जानकारी दी है कि गुरुवार, 17 अप्रैल को उत्तरी चिली में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से करीब 178 किलोमीटर नीचे था। इस तीव्रता के भूकंप को गहरा भूकंप माना जाता है, लेकिन इसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि झटकों को साफ तौर पर महसूस किया गया। भूकंप के झटके महसूस होते ही चिली के कई इलाकों में लोग डरकर घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों में जमा हो गए। भूकंप के कारण लोगों में घबराहट का माहौल बन गया, हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या जान-माल की हानि की खबर सामने नहीं आई है।

उधर म्यांमार में भी भूकंप के लगातार झटके लोगों को डरा रहे हैं। गुरुवार को ही म्यांमार में 3.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसका केंद्र जमीन की सतह से महज 10 किलोमीटर नीचे था। इससे पहले भी इसी दिन म्यांमार में 4.0 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। इस तरह के उथले भूकंप बहुत खतरनाक माने जाते हैं क्योंकि ये सतह के बेहद पास आते हैं। जब भूकंप ज्यादा गहराई की बजाय सतह के करीब होता है तो उससे निकलने वाली ऊर्जा ज्यादा असर करती है, जिससे धरती पर तेज झटके महसूस होते हैं और इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि ऐसे भूकंप ज्यादा जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। गहरे भूकंप अपेक्षाकृत कम असर छोड़ते हैं क्योंकि सतह तक पहुंचते-पहुंचते उनकी ऊर्जा कम हो जाती है।

म्यांमार भूगर्भीय दृष्टि से एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यह देश उन क्षेत्रों में शामिल है जहां दो प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटें — यूरेशियन प्लेट और इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट — आपस में टकराती हैं। टेक्टॉनिक प्लेटों की इसी टकराहट की वजह से म्यांमार में अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इंटरनेशनल अर्थक्वेक साइंस सेंटर के अनुसार, वर्ष 1990 से 2019 के बीच म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल औसतन 140 भूकंप दर्ज किए गए हैं, जिनकी तीव्रता 3.0 या उससे अधिक रही है। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में भूकंप आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से इसकी आवृत्ति और तीव्रता बढ़ी है, वह चिंता का विषय है।

इन हालातों में जरूरी है कि इन क्षेत्रों में भूकंप के प्रति जागरूकता और आपातकालीन तैयारी बढ़ाई जाए। भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली, मजबूत इमारत निर्माण मानक और राहत-बचाव दलों की तत्परता ऐसे क्षेत्रों में लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। चिली और म्यांमार की ताजा घटनाएं एक बार फिर से यह याद दिलाती हैं कि धरती के भीतर की हलचल कब कहां तबाही मचा दे, यह कहना मुश्किल है — लेकिन सतर्कता और तैयारी से हम उसके प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

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