अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई, MIT समेत 88 विश्वविद्यालय प्रभावित

संयुक्त राज्य अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं पर की जा रही कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इस कड़ी में अब मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के छात्रों और शोधकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया है। MIT ने अपने आधिकारिक बयान में जानकारी दी है कि उसके 9 अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं के वीजा बिना किसी पूर्व सूचना या सफाई के रद्द कर दिए गए हैं। CBS की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब तक 88 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लगभग 530 छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के वीजा रद्द कर चुका है।

 

इस कार्रवाई को लेकर MIT की प्रेसिडेंट सैली कोर्नब्लथ ने 14 अप्रैल को यूनिवर्सिटी कम्युनिटी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अमेरिकी सरकार की इन नीतियों पर गहरी चिंता जताई। कोर्नब्लथ ने अपने पत्र में कहा कि यह कदम न केवल संस्थान की गतिविधियों के लिए खतरा हैं, बल्कि अमेरिका की वैज्ञानिक नेतृत्व की क्षमता और वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की नीति के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने लिखा कि 4 अप्रैल से अब तक कम्युनिटी के 9 सदस्यों, जिनमें हाल ही में स्नातक हुए छात्र और कुछ पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता शामिल हैं, के वीजा रद्द किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन फैसलों की न तो कोई पूर्व जानकारी दी गई और न ही कोई स्पष्ट कारण बताया गया, जो स्थिति को और अधिक चिंताजनक बनाता है।

 

इस बीच, ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ एक छात्र ने मुकदमा भी दायर किया है। हालांकि इस मामले में MIT प्रत्यक्ष पक्ष नहीं है, लेकिन यूनिवर्सिटी ने इन घटनाओं के असर को लेकर चिंता जताई है। इसके अलावा, प्रशासन ने अमेरिका की एक फेडरल पॉलिसी में भी बदलाव किया है, जिसका असर प्रमुख विश्वविद्यालयों पर पड़ा है। MIT, प्रिंसटन, कैलटेक और इलिनोइस यूनिवर्सिटी समेत कई टॉप यूनिवर्सिटी ने बोस्टन फेडरल कोर्ट में एनर्जी डिपार्टमेंट (DOE) के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इस मुकदमे में प्रशासन के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें रिसर्च कॉस्ट रिंबर्समेंट को घटाकर 15 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। इससे इन विश्वविद्यालयों को करोड़ों डॉलर का नुकसान होने की आशंका है।

Share this content:

About The Author