सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी, एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना
भारत समेत दुनियाभर में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। शुक्रवार को दिल्ली के सराफा बाजार में सोना 6,250 रुपये प्रति 10 ग्राम की छलांग लगाकर 96,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। जानकारों का मानना है कि सोने में तेजी का सिलसिला अभी थमा नहीं है और यह जल्द ही प्रति 10 ग्राम एक लाख रुपये के आंकड़े को छू सकता है। साल 2025 की शुरुआत से अब तक सोना 20 बार नई ऊंचाइयों को छू चुका है। अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध ने निवेशकों को सोने की ओर मोड़ दिया है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी उछाल आया है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर दिख रहा है।
सोने की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ, केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीदारी और ब्याज दरों में संभावित कटौती को माना जा रहा है। वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत पहली बार 3,200 डॉलर प्रति औंस को पार कर गई है, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3,237.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दो बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे सोने की कीमतों को और समर्थन मिलेगा।
कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह के अनुसार, ब्याज दरों में कमी से निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की खरीद बढ़ा सकते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों में इजाफा होगा। वहीं मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषक किशोर नारने ने सोने की कोई ऊपरी सीमा न मानते हुए अनुमान जताया कि यह 4,000 से 4,500 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकता है। उनका कहना है कि जो भी लक्ष्य तय किया जाएगा, सोना अंततः वहां तक पहुंच जाएगा।
हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि सोने की मौजूदा तेजी सिर्फ एक ट्रेंड का विस्तार है, न कि नई बुल साइकिल की शुरुआत। उनके मुताबिक, अगर कोई नया ट्रिगर सामने नहीं आता है तो अगले हफ्ते तक सोना एक लाख रुपये के स्तर को पार नहीं कर पाएगा। वहीं कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। पेस 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल का कहना है कि अगले छह से दस महीनों में सोने की कीमत 2,600 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है।
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