ट्रंप के टैरिफ फैसले से वैश्विक GDP में 3% गिरावट की आशंका, भारत को मिल सकता है फायदा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ (शुल्क) का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने चीन को छोड़कर अन्य अधिकांश देशों के लिए 90 दिनों के लिए जवाबी शुल्क (Reciprocal Tariff) पर रोक लगाने की घोषणा की है, जबकि चीन पर 145% का भारी शुल्क लगाया गया है। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका से आयात होने वाले सामान पर 125% तक का शुल्क लगाने का फैसला किया है।
वैश्विक व्यापार पर गहराया संकट, GDP में संभावित गिरावट
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन टैरिफ की वजह से वैश्विक व्यापार में लगभग 3% तक की गिरावट आ सकती है, जो दुनिया की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को भी प्रभावित करेगी। अनुमान है कि 2040 तक जारी रहने वाले टैरिफ युद्ध के चलते वैश्विक GDP में 0.7% तक की गिरावट संभव है।
भारत को मिल सकता है बड़ा लाभ
टैरिफ के कारण अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों से निर्यात घट सकता है, जिससे भारत, ब्राजील और कनाडा जैसे देशों को निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं। जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र की कार्यकारी निदेशक पामेला कोक-हैमिल्टन के अनुसार, मेक्सिको और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों से हटता व्यापार अब भारत की ओर मुड़ सकता है। उन्होंने बताया कि इससे भारत को लाभ मिल सकता है, खासतौर पर टेक्सटाइल और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में।
विकासशील देशों के लिए चेतावनी और सलाह
पामेला कोक-हैमिल्टन ने यह भी कहा कि विकासशील देशों को विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय एकीकरण जैसे पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे वैश्विक संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। यह आकलन फ्रांसीसी अर्थशास्त्र अनुसंधान संस्थान CEPII के सहयोग से तैयार किया गया है, जो टैरिफ लागू होने से पहले के आंकड़ों पर आधारित है।
टेक्सटाइल सेक्टर पर टैरिफ का असर
उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर बांग्लादेश जैसे देश पर भी भारी टैरिफ लागू होता है, तो वहां से अमेरिका को होने वाला परिधान निर्यात 37% तक घट सकता है, जिससे अमेरिकी निर्यात को सालाना 3.3 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
चीन भी मुकाबले को तैयार
वॉशिंगटन डीसी स्थित एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) की उपाध्यक्ष वेंडी कटलर ने कहा कि चीन अब व्यापार युद्ध में पूरी तरह से सक्रिय है और लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि चीन के पास भी कई जवाबी उपाय मौजूद हैं, जिन्हें वह लागू कर सकता है।
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