चार्टर्ड अकाउंटेंट से बने कल्ट फिल्ममेकर, शेखर कपूर ने छोड़ दी बसी-बसाई नौकरी, सिनेमा को दी एक से बढ़कर एक क्लासिक फिल्में
भारतीय सिनेमा में कुछ ही ऐसे फिल्ममेकर हुए हैं जिनकी हर फिल्म क्लासिक या कल्ट सिनेमा का दर्जा पा चुकी है। इन्हीं में एक नाम है शेखर कपूर का — एक ऐसे निर्देशक जिन्होंने न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी भारतीय सिनेमा का डंका बजाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि निर्देशन की दुनिया में आने से पहले शेखर कपूर चार्टर्ड अकाउंटेंट थे?
चार्टर्ड अकाउंटेंसी से फिल्म निर्देशन तक का सफर
शेखर कपूर का जन्म और पालन-पोषण पंजाब में हुआ, जहां शिक्षा को बहुत महत्व दिया जाता था। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी में डिग्री हासिल की और पेशेवर जीवन की शुरुआत इसी क्षेत्र में की। लेकिन उनका झुकाव हमेशा से रचनात्मकता और कहानी कहने की कला की ओर था। आखिरकार, उन्होंने सुरक्षित करियर छोड़कर फिल्मी दुनिया में कदम रखा।
हाल ही में शेखर कपूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की जिसमें उन्होंने अपनी चार्टर्ड अकाउंटेंसी की फेलोशिप का सर्टिफिकेट दिखाते हुए लिखा, “और अचानक यह मेरे जीवन में वापस आ गया! ठीक उसी समय जब मैं अपना ऑफिस साफ कर रहा था…” यह पोस्ट उनके शानदार करियर की एक अनकही शुरुआत की झलक देती है।
कल्ट फिल्मों की लंबी लिस्ट
शेखर कपूर ने अपने करियर में ‘मासूम’, ‘बैंडिट क्वीन’, और ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म ‘एलिज़ाबेथ’ जैसी बेहतरीन फिल्में बनाई हैं। हर फिल्म में उन्होंने समाज के गहरे पहलुओं को छूने की कोशिश की और दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
वैश्विक स्तर पर भारतीय सिनेमा की पहचान
शेखर कपूर उन गिने-चुने निर्देशकों में हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। उनकी फिल्मों की सराहना न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी हुई है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट से फिल्म निर्देशक बनने का उनका ये सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने पैशन को फॉलो करने का साहस रखते हैं।
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