2 महीने में दूसरी बार सस्ता हुआ होम-कार लोन! RBI ने रेपो रेट में फिर की कटौती, EMI पर मिलेगी राहत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम लोगों और उधारकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में एक बार फिर कटौती की है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25% की कटौती करते हुए इसे 6% कर दिया है। इससे पहले फरवरी 2025 में भी रेपो रेट में इतनी ही कटौती की गई थी। दो महीने में यह लगातार दूसरी कटौती है, जिससे होम और ऑटो लोन लेने वालों के लिए किस्तों का बोझ हल्का होने वाला है।
EMI पर होगा सीधा असर, लोन लेना होगा सस्ता
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इस दर में कटौती का सीधा असर बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन पर पड़ता है। रेपो रेट घटने का मतलब है कि बैंक अब सस्ते ब्याज पर कर्ज लेंगे और यह फायदा वे ग्राहकों को देंगे। यानी अब होम लोन, कार लोन जैसी सुविधाओं पर ब्याज दर घटेगी और ईएमआई पहले से कम हो जाएगी।
उदाहरण के तौर पर, अगर आपने 20 लाख रुपये का होम लोन 20 वर्षों के लिए लिया है और ब्याज दर 9% से घटकर 8.75% हो जाती है, तो आपकी मासिक किस्त (EMI) करीब 300 रुपये कम हो सकती है और कुल लोन अवधि में 70,000 से 80,000 रुपये तक की बचत संभव है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की घोषणा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हुई थी, जिसमें सभी सदस्यों ने इस कटौती पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि महंगाई में अब गिरावट देखी जा रही है, जो कि एक सकारात्मक संकेत है। इसीलिए RBI ने मौद्रिक नीति के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘अकोमोडेटिव’ कर दिया है, जिससे आगे भी जरूरत के हिसाब से और कटौती की जा सकेगी।
वैश्विक हालात पर RBI की नजर
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण हैं, खासकर उच्च टैरिफ और व्यापार में अस्थिरता के कारण। इसका असर भारत के एक्सपोर्ट पर भी दिख सकता है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ दिख रही है और बैंकों की स्थिति भी बेहतर बनी हुई है।
हालांकि, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP ग्रोथ रेट) को 6.7% से घटाकर 6.5% कर दिया है।
क्या है आगे की रणनीति?
गवर्नर ने संकेत दिया है कि यदि आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो आगे भी रेपो रेट में कटौती की जा सकती है। इससे स्पष्ट है कि आरबीआई का मुख्य फोकस महंगाई नियंत्रण के साथ-साथ विकास को संतुलित रखने पर है।
कुल मिलाकर, यह रेपो रेट कटौती न सिर्फ उधार लेने वालों के लिए राहत की खबर है, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत भी है कि अब लोन सस्ते होंगे और मांग को बढ़ावा मिलेगा।
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