क्या यही है ग्लोबल मंदी की आहट? ट्रंप की टैरिफ नीति से दहशत में दुनिया के बाजार
वॉशिंगटन/लंदन/हांगकांग – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त टैरिफ नीति एक बार फिर वैश्विक बाजारों पर कहर बनकर टूटी है। 7 अप्रैल को दिए गए ट्रंप के बयान ने केवल अमेरिकी शेयर बाजार को नहीं, बल्कि पूरे विश्व के आर्थिक ढांचे को हिला कर रख दिया। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा कि विदेशी सरकारों को अमेरिकी टैरिफ हटवाने के लिए “बहुत भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी।
हालांकि शुरुआत में संकेत मिले थे कि कुछ देशों के लिए टैरिफ को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है, जिससे बाजारों में थोड़ी राहत महसूस की गई। लेकिन कुछ ही घंटों बाद व्हाइट हाउस ने इन खबरों को फर्जी बता दिया, और यह उलझन फिर से बाजारों पर भारी पड़ी।
शेयर बाजारों में हाहाकार
ट्रंप के इस अप्रत्याशित रुख से अमेरिकी शेयर बाजार दिन की शुरुआत में ही गिरावट के साथ खुले। हालांकि CNBC को दिए एक इंटरव्यू में व्हाइट हाउस के सलाहकार केविन हैसेट ने कहा कि ट्रंप चीन को छोड़कर बाकी देशों के लिए 90 दिनों तक टैरिफ पर रोक लगाने पर विचार कर रहे हैं। यह बयान बाजारों के लिए थोड़ी राहत की खबर बना।
लेकिन कुछ ही देर बाद व्हाइट हाउस ने इसे “फेक न्यूज” करार दे दिया। इस दोतरफा संदेश ने निवेशकों को और अधिक भ्रमित किया और बाजारों में फिर से गिरावट आ गई। एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में भी इसका असर दिखा। जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और फ्रांस के इंडेक्स भारी गिरावट के साथ बंद हुए। तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक आर्थिक चिंताओं को और बल मिला।
EU की प्रतिक्रिया – बातचीत या मुकाबला?
इस बीच यूरोपीय संघ (EU) ने अमेरिका को औद्योगिक वस्तुओं पर “जीरो-फॉर-जीरो” टैरिफ नीति का प्रस्ताव दिया है—यानि दोनों पक्ष अपने-अपने आयात शुल्क को शून्य कर दें। हालांकि यूरोपीय देशों के बीच इस पर अभी एकराय नहीं बनी है कि ट्रंप के खिलाफ कितनी सख्ती बरती जाए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि EU बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अगर अमेरिका पीछे नहीं हटता, तो प्रतिक्रिया भी दी जाएगी।
मंदी की चेतावनी: क्या सबसे बुरा समय बाकी है?
ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर सिर्फ बाजार ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख आर्थिक संस्थान भी चिंतित हैं।
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगले 12 महीनों में अमेरिका में मंदी की आशंका अब 45% तक बढ़ चुकी है। जेपी मॉर्गन के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि टैरिफ के कारण अमेरिका की जीडीपी में 0.3% तक की गिरावट हो सकती है—जबकि पहले वे 1.3% की वृद्धि की उम्मीद कर रहे थे।
कनेक्टिकट की डकोटा वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी के वरिष्ठ पोर्टफोलियो मैनेजर रॉबर्ट पाव्लिक ने स्पष्ट रूप से कहा, “लोगों को डर है कि अभी सबसे बुरा समय आना बाकी है। बाजार में और गिरावट की आशंका हर निवेशक के चेहरे पर दिख रही है।”
ट्रेड वॉर की कगार पर दुनिया?
ट्रंप जिस टैक्स नीति को ‘दवा’ बता रहे हैं, वह अब दुनिया के लिए आर्थिक बुखार बनती जा रही है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये टैरिफ लागू रहे, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ेगा, मांग घटेगी और उत्पादन महंगा हो जाएगा। इसका सीधा मतलब है—मंदी की शुरुआत और एक नई वैश्विक ट्रेड वॉर का जन्म।
ट्रंप की आक्रामक टैरिफ रणनीति केवल एक घरेलू राजनीतिक कार्ड नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए सीधा खतरा बनती जा रही है। चाहे बात निवेशकों के डर की हो, बाजारों की गिरावट की या वैश्विक मंदी की चेतावनी की—हर संकेत यही कह रहा है कि आर्थिक तूफान का केन्द्र धीरे-धीरे अमेरिका बनता जा रहा है।
अब सवाल ये है: क्या दुनिया इस तूफान के लिए तैयार है?
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