April 19, 2026

एक झटके में लुट गए करोड़ों! हर्षद मेहता से लेकर 2024 लोकसभा चुनाव तक, जब शेयर बाजार ने निवेशकों को बना दिया कंगाल

शेयर बाजार – जहां हर सुबह करोड़ों सपनों की बोली लगती है, और हर शाम उनमें से कुछ अधूरे रह जाते हैं। बीते तीन दशकों में निवेशकों ने इस बाजार में कभी दौलत कमाई तो कभी एक झटके में सब गंवा बैठे। 1992 में हर्षद मेहता घोटाले से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों तक, कई ऐसे मौके आए जब शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया और निवेशकों की मेहनत की कमाई चंद मिनटों में स्वाहा हो गई।

1992 – हर्षद मेहता का भूकंप
90 के दशक की शुरुआत में शेयर बाजार तेजी से भाग रहा था, जब तक कि हर्षद मेहता घोटाला सामने नहीं आया। एक दिन में करीब 13% की गिरावट ने निवेशकों की नींव हिला दी। देश भर में अफरा-तफरी मच गई। निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा और बाजार की साख पर गहरा धक्का लगा।

2008 – ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस का तूफान
अमेरिका से उठी सबप्राइम संकट की लहर ने पूरी दुनिया को हिला दिया। भारत भी अछूता नहीं रहा। जनवरी 2008 में बाजार बुरी तरह टूटा। निवेशकों के अरबों रुपये एक झटके में डूब गए। यह गिरावट लंबी और दर्दनाक थी, जिसने एक पीढ़ी को जोखिम से डरा दिया।

2015-2016 – चीन की धमक से डगमगाया भारत
जब चीन की अर्थव्यवस्था में दरारें आईं, उसका असर भारत के बाजारों पर भी साफ दिखा। निवेशकों की भावनाएं कमजोर पड़ीं और बाजार कई बार गिरे। हालांकि रिकवरी धीरे-धीरे हुई, लेकिन नुकसान गहरा था।

2016 – नोटबंदी का झटका
8 नवंबर 2016 की रात जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की, बाजार अगले दिन टूट गया। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखी गई। नकदी संकट और अनिश्चितता ने निवेशकों को चौंका दिया।

2020 – कोरोना की सुनामी
23 मार्च 2020… वो तारीख जब बाजार ने इतिहास रच दिया, लेकिन गलत मायनों में। कोविड के डर और लॉकडाउन की घोषणा के बाद एक ही दिन में 13% से ज्यादा की गिरावट आई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लहूलुहान हो गए। निवेशकों को कई लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

2024 – लोकसभा चुनाव का झटका
साल 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों ने निवेशकों को उम्मीदों से भर दिया था, लेकिन नतीजों की अनिश्चितता ने बाजार को हिला दिया। एक ही दिन में सेंसेक्स करीब 6% टूट गया और निवेशकों के 31 लाख करोड़ रुपये डूब गए। यह एक दशक की सबसे बड़ी गिरावटों में शामिल हो गया।

हालिया गिरावट – टैरिफ वॉर और मंदी की आहट
ट्रंप और चीन के बीच चल रही टैरिफ वॉर और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के चलते हाल ही में फिर से बाजार में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई। इस एक दिन में निवेशकों को 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। सेंसेक्स ने लगभग 3,939 अंक और निफ्टी ने 1,160 अंक की गिरावट दिखाई।

1992 से 2024 तक शेयर बाजार ने बार-बार यह साबित किया है कि यह जगह जितनी मुनाफे वाली है, उतनी ही खतरनाक भी। बाजार की हर गिरावट एक सबक छोड़ जाती है—धैर्य, विवेक और जोखिम का सही आकलन ही असली निवेशक की पहचान है।

तो अगली बार जब बाजार चढ़े, तो सोचिए – कहीं ये चढ़ाई किसी गिरावट से पहले की खामोशी तो नहीं?

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