वर्ल्ड हेल्थ डे 2025: क्या हम एक ‘साइलेंट किलर’ की चपेट में हैं? कैंसर के बढ़ते मामलों ने दी खौफनाक दस्तक!
7 अप्रैल 2025 — पूरी दुनिया आज विश्व स्वास्थ्य दिवस मना रही है, लेकिन इस दिन भारत के सामने एक गंभीर और डरावना सवाल खड़ा है:
क्या हम कैंसर जैसी ‘खामोश मौत’ की तरफ आंखें मूंदे बढ़ रहे हैं?
कैंसर: एक बढ़ता खतरा, जो देरी से देता है दस्तक
भारत में नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़ेस (गैर-संक्रामक रोग)—जैसे डायबिटीज, हृदय रोग और विशेष रूप से कैंसर—तेजी से फैल रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में 60% से अधिक कैंसर के मामलों की पहचान तब होती है जब बीमारी अंतिम स्टेज में पहुंच चुकी होती है।
और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
एम्स दिल्ली के पूर्व रेडिएशन ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. जी.के. रथ का कहना है कि अगर कैंसर की समय पर पहचान (Early Detection) हो जाए, तो लगभग 60% मामलों में इलाज पूरी तरह संभव है। लेकिन अधिकतर मामलों में लोग लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं—और यही लापरवाही जानलेवा साबित होती है।
कैंसर के साइलेंट अलार्म: इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
अचानक वजन कम होना, बिना किसी वजह
शरीर में खून की कमी, बार-बार चक्कर आना
लगातार थकान, ऊर्जा की भारी कमी
किसी भी हिस्से में गांठ, जो लंबे समय से बनी हुई हो और ठीक न हो
डॉक्टरों की सलाह है कि अगर कोई भी शारीरिक समस्या एक महीने से ज्यादा बनी हुई है, तो खुद से दवा लेने की बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलें।
हर 6 महीने में एक हेल्थ चेकअप करवाना भी बेहद जरूरी है।
70% मौतों का कारण बन रही हैं ये बीमारियां
भारत में कुल मौतों का 70% हिस्सा गैर-संक्रामक बीमारियों से जुड़ा है, और कैंसर इस लिस्ट में तेजी से ऊपर चढ़ रहा है।
ये वो बीमारियां हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलतीं, लेकिन समाज की चुप्पी और जागरूकता की कमी इन्हें फैलने का खुला मौका देती है।
क्या करें? – बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है
लक्षणों को हल्के में न लें, वक्त रहते जांच कराएं, और दूसरों को भी जागरूक करें।
क्योंकि जब बात कैंसर की हो, तो हर पल ज़िंदगी और मौत के बीच का फासला हो सकता है।
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