April 17, 2026

बहराइच में गूंजा ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष: भगवान राम के जन्मोत्सव पर निकली भव्य शोभायात्रा ने शहर को किया भक्तिमय

बहराइच में शनिवार की सुबह एक अद्भुत धार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। विश्व हिंदू परिषद बहराइच के तत्वावधान में आयोजित इस शोभायात्रा ने पूरे शहर को राममय बना दिया। सिद्धनाथ मंदिर से प्रारंभ हुई इस यात्रा में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी, जिसने पूरे वातावरण को श्रद्धा, भक्ति और जय श्रीराम के उद्घोषों से गुंजायमान कर दिया।

शोभायात्रा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लोगों की उत्साहपूर्वक भागीदारी देखने को मिली। राम नाम का जप करते हुए श्रद्धालु जब संगठित होकर नगर भ्रमण पर निकले, तो मानो पूरा शहर धर्म, संस्कृति और आस्था की छांव में आ गया। शोभायात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे, जहाँ स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

इस शोभायात्रा की विशेष बात यह रही कि इसमें भगवान राम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को चित्रों और प्रतीकों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कहीं राम के बाल रूप को दर्शाया गया, तो कहीं अयोध्या के राजतिलक का दृश्य दिखाई दिया। वनवास, सीता हरण, हनुमान की भक्ति और लंका विजय जैसे प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को रामायण की गहराइयों में ले जाकर भावविभोर कर दिया।

आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनमानस को भगवान राम के जीवन से जोड़ना और उनके आदर्शों को समाज में पुनः स्थापित करना है। राम के त्याग, मर्यादा, सेवा और धर्म के लिए समर्पण जैसे गुण आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने त्रेता युग में थे। इस शोभायात्रा के माध्यम से इन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।

शोभायात्रा के समापन पर धार्मिक प्रवचन व आरती का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने राम की शिक्षाओं को आत्मसात करने का आह्वान किया। पूरा शहर राम भक्ति की लहर में डूबा रहा और चारों ओर ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष गूंजते रहे।

बहराइच में आयोजित इस शोभायात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज भी भगवान राम के आदर्श समाज को दिशा देने की शक्ति रखते हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक सौहार्द, एकता और संस्कृति की जीवंत मिसाल भी बन गया।

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