April 17, 2026

नैनीताल से लौट रही दो युवतियों की रहस्यमयी मौत: टक्कर या कुछ और? परिजन बोले- हादसे की नहीं, साजिश की बू आ रही है

मुरादाबाद के दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने दो परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। एक ही कार में सवार चार लोग – दो युवक और दो युवतियाँ – नैनीताल से लौट रहे थे, तभी मूंढापांडे थाना क्षेत्र के जीरो प्वाइंट के पास उनकी कार एक ट्रक से टकरा गई। इस हादसे में हरियाणा के रोहतक निवासी सिमरन और शिवानी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में साथ बैठे युवक – राहुल और संजू – मामूली रूप से घायल होकर बच निकले।

हालांकि, इस हादसे के बाद जो सवाल उठे हैं, उन्होंने मामले को एक दर्दनाक दुर्घटना से कहीं ज्यादा रहस्यमय और संदिग्ध बना दिया है। परिजनों का आरोप है कि यह केवल एक सड़क हादसा नहीं हो सकता। उन्होंने शंका जताई है कि युवतियों की मौत और युवकों का केवल खरोंच भर आना, किसी गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।

‘एक ही कार में थे, फिर सिर्फ हमारी बेटियां क्यों मरीं?’ – पिता का दर्द और सवाल

सिमरन के पिता अनिल गोसाई का कहना है कि उनकी बेटी सिमरन होली हार्ट अस्पताल, रोहतक में नर्स थी। उसी अस्पताल में काम करने वाली शिवानी भी उस दिन उनके साथ थी। दोनों 31 मार्च को राहुल और संजू के साथ नैनीताल घूमने गई थीं। लेकिन जब मंगलवार देर रात उन्हें पुलिस से सूचना मिली कि उनकी बेटी की सड़क हादसे में मौत हो गई है, तो उनकी दुनिया ही उजड़ गई।

मुरादाबाद पहुंचने पर अनिल ने देखा कि युवतियों की मौत हो चुकी है और दोनों युवक मामूली रूप से घायल हैं। उन्होंने बताया कि हादसे के तुरंत बाद राहुल और संजू को उनके परिजन जिला अस्पताल से रेफर करवा कर कहीं और ले गए, जिससे मामले को और संदेहास्पद बना दिया।

“चारों एक ही गाड़ी में थे, फिर हमारी बेटियां ही क्यों मरीं और लड़कों को सिर्फ खरोंच आई?” – अनिल ने यह सवाल उठाते हुए मुरादाबाद पुलिस से हादसे की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। वह अलग से तहरीर देने की तैयारी में हैं। उधर, शिवानी के परिजनों ने भी युवतियों की मौत पर सवाल उठाते हुए किसी बड़ी साजिश की आशंका जताई है।

कानपुर के नाम ट्रक, लेकिन चालक अब तक फरार

हादसे में टक्कर मारने वाले ट्रक का पता तो चल गया है। वह कानपुर निवासी एक व्यक्ति के नाम दर्ज है। लेकिन घटना के तीन दिन बाद भी ट्रक चालक का कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस की अब तक की कार्यवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में केस घायल युवक राहुल के पिता रमेश की ओर से दर्ज कराया गया, जबकि मृतक युवतियों के परिजनों की शिकायत अब तक पुलिस रिकॉर्ड में नहीं आई है।

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह का कहना है कि यदि मृतक युवतियों के परिजन तहरीर देते हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

क्या ये सिर्फ हादसा था या कुछ और?

पूरे घटनाक्रम में कई सवाल अनुत्तरित हैं:

अगर ट्रक की टक्कर इतनी भीषण थी कि पिछली सीट पर बैठी दो युवतियों की मौत हो गई, तो अगली सीट पर बैठे युवक कैसे सिर्फ खरोंच के साथ बच निकले?

युवकों को इतनी जल्दी जिला अस्पताल से रेफर क्यों किया गया, और वे कहां चले गए?

हादसे की एफआईआर मृतकों के परिजन की बजाय घायलों के परिजन ने क्यों दर्ज कराई?

तीन दिन बाद भी ट्रक चालक क्यों फरार है?

इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन परिजनों की आह और संदेह ने इस हादसे को एक रहस्यमयी मोड़ पर ला खड़ा किया है।

क्या यह सचमुच एक सड़क हादसा था, या फिर इस हादसे के पीछे कोई रची गई कहानी है?

पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच अब इन सवालों का जवाब देने के लिए महत्वपूर्ण होगी। लेकिन जब तक सच सामने नहीं आता, तब तक सिमरन और शिवानी के परिवारों का भरोसा यही कहता रहेगा – यह सिर्फ हादसा नहीं था… कुछ छिपाया जा रहा है।

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