April 17, 2026

गर्मी का बढ़ता खतरा: इंसान की सहनशक्ति पर नया शोध, कब होगी सीमा पार?

गर्मी और आर्द्रता से जुड़े खतरों पर एक नए शोध में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कनाडा के ओटावा विश्वविद्यालय और लंदन के किंग्स कॉलेज द्वारा किए गए अध्ययनों से पता चला है कि मनुष्यों की अत्यधिक गर्मी सहने की सीमा पहले की तुलना में घट सकती है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज पत्रिका में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, जब शरीर का कोर तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो हीट स्ट्रोक का खतरा महज 10 घंटों में पैदा हो सकता है।

थर्मल स्टेप प्रोटोकॉल से हुआ बड़ा खुलासा

ओटावा विश्वविद्यालय की टीम ने 12 स्वयंसेवकों को 42 डिग्री सेल्सियस तापमान और 57 प्रतिशत आर्द्रता (जिसका ह्यूमिडेक्स 62 डिग्री सेल्सियस था) के संपर्क में रखा। इस दौरान देखा गया कि अधिकांश प्रतिभागी नौ घंटे भी नहीं झेल सके और उनका शरीर लगातार गर्म होता गया। यह प्रयोग यह समझने के लिए किया गया कि किस बिंदु पर व्यक्ति का शरीर स्थिर तापमान बनाए रखने में असमर्थ हो जाता है।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बढ़ती गर्मी और आर्द्रता के कारण भविष्य में ऐसे हालात आम हो सकते हैं। ओटावा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ग्लेन केनी ने बताया कि जलवायु मॉडल और शरीर विज्ञान के आंकड़ों को मिलाकर गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

लंदन के किंग्स कॉलेज के अध्ययन के अनुसार, दुनिया की लगभग छह प्रतिशत भूमि पर युवा वयस्कों के लिए भीषण गर्मी असहनीय हो सकती है, जबकि वृद्धों को और भी अधिक खतरा होगा। “नेचर रिव्यूज अर्थ एंड एनवायरनमेंट” में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, दक्षिण एशिया उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां इसका सबसे अधिक असर देखने को मिलेगा।

शहरों को तैयार करने की जरूरत

यह शोध स्पष्ट करता है कि अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए शहरों को नए सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। अगर तापमान इसी गति से बढ़ता रहा, तो गर्मी के कारण बीमारियों और मृत्यु दर में वृद्धि हो सकती है।

बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के बीच यह शोध एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि मानव शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता सीमित है और भविष्य में यह और कम हो सकती है। शहरों को गर्मियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है ताकि आने वाले समय में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!