April 20, 2026

रुपया ने मार्च में अमेरिकी डॉलर को जोरदार झटका दिया: 64 महीनों में सबसे बड़ी तेजी!

वित्त वर्ष 2025 में डॉलर के मुकाबले रुपया दो रुपए से ज्यादा कमजोर हुआ, लेकिन मार्च के महीने में उसने ऐसी रिकवरी दिखाई है, जो पिछले 64 महीनों में सबसे बड़ी तेजी के रूप में उभरी है। यह बदलाव भारतीय करेंसी बाजार में एक अहम घटनाक्रम के रूप में सामने आया है, जो विश्लेषकों और बाजार के जानकारों के लिए चौंकाने वाला है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मार्च में 2.17 फीसदी मजबूत हुआ, जो नवंबर 2018 के बाद सबसे बड़ी मासिक बढ़त है।

64 महीने के बाद सबसे बड़ी तेजी

इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में शुक्रवार को, वित्त वर्ष के आखिरी कारोबारी दिन, रुपया 24 पैसे की वृद्धि के साथ 85.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह दिन का सबसे ऊंचा स्तर था, जबकि रुपया 85.64 पर ओपन हुआ था और कारोबार के दौरान यह 85.40 और 85.70 के बीच झूलता रहा। इससे पहले, गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 85.74 पर बंद हुआ था, जो कि पांच पैसे की कमजोरी को दर्शाता था।

मार्च महीने में रुपए ने 2.17 फीसदी का इजाफा देखा है, जो नवंबर 2018 के बाद सबसे ज्यादा है। उस समय रुपया पांच फीसदी तक मजबूत हुआ था। हालांकि, वित्त वर्ष 2025 में रुपया दो फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ है, और आगामी अप्रैल में डॉलर के मुकाबले इसकी स्थिति 83.42 तक गिर चुकी थी।

रुपया में तेजी के कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च में रुपया की मजबूती में मुख्य कारण विदेशी निवेशकों का निवेश है। पिछले छह कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजार में 32,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इसने भारतीय रुपया को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, घरेलू बाजार की कमजोरी और डॉलर की मजबूती ने रुपये की तेज वृद्धि को सीमित किया है।

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा, “हमारा अनुमान है कि विदेशी निवेशकों के पूंजी प्रवाह के कारण रुपया सकारात्मक दिशा में रहेगा। हालांकि, आयातकों और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की मासांत डॉलर मांग और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण रुपये में बहुत अधिक तेजी की उम्मीद नहीं है।” उनका कहना है कि अगले कुछ दिनों में डॉलर-रुपया हाजिर मूल्य 85.15 से 86.70 के बीच रह सकता है।

डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल में गिरावट

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.31 फीसदी गिरकर 104.01 पर आ गया। इसी दौरान, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.54 फीसदी की गिरावट के साथ 73.63 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इन दोनों घटनाओं ने भी रुपया की मजबूती को समर्थन प्रदान किया।

शेयर बाजार की स्थिति

वहीं, घरेलू शेयर बाजार में बीएसई सेंसेक्स 191.51 अंक की गिरावट के साथ 77,414.92 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 72.60 अंक घटकर 23,519.35 अंक पर बंद हुआ। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) पूंजी बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे, और उन्होंने शुक्रवार को शुद्ध रूप से 4,352.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

अगले वित्त वर्ष में रुपया के लिए संभावनाएं

यदि बात की जाए अगले वित्त वर्ष की, तो कुछ जानकारों का मानना है कि रुपये में और भी बढ़त देखने को मिल सकती है। इसके पीछे कारण माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रेपो रेट में संभावित गिरावट कर सकता है और विदेशी निवेशकों के लिए निवेश लिमिट में इजाफा करने की योजना बना सकता है। हालांकि, इस वर्ष टैरिफ में इजाफा, डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है, जिसके कारण डॉलर इंडेक्स में वृद्धि हो सकती है। साथ ही, जियोपॉलिटिकल टेंशन और व्यापारिक टैरिफ की स्थिति भी डॉलर को मजबूती प्रदान कर सकती है।

कुल मिलाकर, रुपया के लिए मार्च का महीना एक शानदार प्रदर्शन साबित हुआ है, और आगे आने वाले महीनों में इसके लिए और भी संभावनाएं नजर आ रही हैं, हालांकि चुनौतियां भी सामने हैं।

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