April 20, 2026

RBI के अगले वित्तीय वर्ष की MPC बैठकें तय, क्या रेट कट में राहत देगा रिजर्व बैंक?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को अप्रैल 2025 से शुरू होने वाले अगले वित्तीय वर्ष के लिए अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठकों की तारीखों का ऐलान किया है। एमपीसी की छह बैठकें अगले वित्तीय वर्ष में आयोजित की जाएंगी। इनमें से पहली बैठक 7 से 9 अप्रैल 2025 तक होगी, जिसमें प्रमुख मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास के आंकड़ों पर चर्चा की जाएगी। सबसे अहम बात यह है कि अगले महीने की बैठक में एक बार फिर से बैंकों और रिटेल लोन धारकों को राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि बाजार में यह चर्चा चल रही है कि आरबीआई अपनी रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है।

इस बैठक की पूरी दुनिया में निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि फरवरी 2025 की आखिरी बैठक में आरबीआई ने पहली बार अपनी रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती की थी, जिससे यह 6.25 फीसदी पर आ गई थी। अब दूसरी बार भी इस रेट कट की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे लोन की दरें और सस्ती हो सकती हैं, खासकर होम लोन और अन्य रिटेल लोन धारकों के लिए।

अगले वित्तीय वर्ष की बैठकों की तारीखें इस प्रकार हैं:

  1. पहली बैठक: 7-9 अप्रैल 2025
  2. दूसरी बैठक: 4-6 जून 2025
  3. तीसरी बैठक: 5-7 अगस्त 2025
  4. चौथी बैठक: 29 सितंबर – 1 अक्टूबर 2025
  5. पाँचवीं बैठक: 3-5 दिसंबर 2025
  6. छठी बैठक: 4-6 फरवरी 2026

RBI की MPC क्या है?

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) छह सदस्यों का एक पैनल है, जो देश की प्रमुख ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है। यह समिति महंगाई को नियंत्रित करने, मुद्रा स्थिरता बनाए रखने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। MPC की बैठकें हर दो महीने में होती हैं, और इसमें रेपो दर पर निर्णय लिया जाता है, जो अर्थव्यवस्था में लोन और डिपॉजिट रेट्स को प्रभावित करती है।

आरबीआई MPC के सदस्य कौन हैं?

MPC के सदस्यों में तीन सदस्य आरबीआई से होते हैं – गवर्नर, मॉनेटरी पॉलिसी के प्रभारी डिप्टी गवर्नर और आरबीआई बोर्ड द्वारा चुने गए एक अधिकारी, और तीन अन्य सदस्य सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं। इस समय के आरबीआई MPC के सदस्य हैं:

  • संजय मल्होत्रा (RBI गवर्नर)
  • डॉ. राजीव रंजन (RBI के कार्यकारी निदेशक)
  • एम. राजेश्वर राव (RBI के डिप्टी गवर्नर)
  • डॉ. नागेश कुमार
  • सौगत भट्टाचार्य
  • प्रो. राम सिंह

यह पैनल ब्याज दरों में परिवर्तन करने के अलावा, आर्थिक नीति के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा करता है, ताकि देश की वित्तीय स्थिति को संतुलित किया जा सके।

अब देखना यह होगा कि आरबीआई की अगली बैठक में रेपो रेट में कितनी कटौती होती है, और क्या यह फैसला भारत के लाखों कर्जदारों को राहत प्रदान करेगा।

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