भूपेश बघेल और अन्य अधिकारियों के आवास पर सीबीआई की बड़ी छापेमारी, महादेव सट्टा घोटाले में कार्रवाई तेज
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के भिलाई और रायपुर स्थित आवास पर मंगलवार की सुबह सीबीआई ने छापेमारी की। सुबह साढ़े 5 बजे सीबीआई की टीम ने भूपेश बघेल के अलावा चार पुलिस अधिकारियों के घर पर भी दबिश दी। जिन अधिकारियों के बंगले पर सीबीआई ने छापेमारी की, उनमें एडिशनल एसपी अभिषेक माहेश्वरी, आईपीएस अभिषेक पल्लव, आईपीएस आरिफ शेख और आईपीसी आनंद छाबड़ा शामिल हैं।
सीबीआई की इस छापेमारी को महादेव सट्टा ऐप मामले से जोड़ा जा रहा है, जो हाल ही में 20,000 करोड़ रुपये के घोटाले के रूप में सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में पूर्व कांग्रेस सरकार और उनके अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे, जिन्होंने महादेव सट्टा ऑपरेशन में कथित तौर पर भूमिका निभाई थी। इस घोटाले के संबंध में भूपेश बघेल पर 500 करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप भी लगाया गया है।
यह मामला और भी संवेदनशील हो गया था जब शुभम सोनी नामक व्यक्ति ने एक वीडियो जारी करते हुए भूपेश बघेल पर आरोप लगाए थे। इसके बाद सीबीआई ने यह कार्रवाई शुरू की।
भूपेश बघेल ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर अपने कार्यालय के हवाले से एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कहा, “अब सीबीआई आई है। आगामी 8 और 9 अप्रैल को अहमदाबाद (गुजरात) में होने वाली AICC की बैठक के लिए गठित ‘ड्राफ्टिंग कमेटी’ की मीटिंग के लिए आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दिल्ली जाने का कार्यक्रम था, और उससे पहले ही सीबीआई रायपुर और भिलाई निवास पहुंच चुकी है।”
कांग्रेस पार्टी के छत्तीसगढ़ संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने सीबीआई की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बीजेपी की मोदी सरकार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आवास पर सीबीआई भेजी है। सीबीआई रायपुर और भिलाई दोनों जगहों पर पहुंच गई है।”
यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा महादेव सट्टा ऐप घोटाले के संबंध में की जा रही जांच का हिस्सा है, जिसमें कई प्रमुख नेताओं और अधिकारियों का नाम सामने आया है।
गौरतलब है कि इससे पहले 10 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इसी मामले के सिलसिले में दुर्ग जिले में 14 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल के आवास पर भी छापेमारी की गई थी। इस दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी, और लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल, जो चैतन्य बघेल का करीबी सहयोगी बताया गया था, से भी जुड़े स्थानों की तलाशी ली गई थी।
इस छापेमारी और जांच से जुड़ी कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है, और यह मामला अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है।
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