बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर का विवादित बयान: ‘कलश यात्रा रोकने की साजिश, मुझे मारने की योजना’
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित लोनी से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक नंदकिशोर गुर्जर एक नए विवाद में घिर गए हैं। विधायक ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि गाजियाबाद के स्थानीय अधिकारियों ने उनकी कलश यात्रा को रोकने के लिए साजिश रची है। यह मामला तब सामने आया, जब पुलिस ने उन्हें अपनी वार्षिक राम कथा यात्रा निकालने से रोक दिया। उनके इस बयान के बाद पार्टी से नोटिस मिलने की खबरें आई थीं, लेकिन नंदकिशोर गुर्जर ने इस बात से इनकार किया और कहा कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है।
नोटिस की खबरों से इंकार
नंदकिशोर गुर्जर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें बीजेपी से कोई नोटिस नहीं मिला है। विधायक ने साफ किया कि उनके खिलाफ जो खबरें सामने आ रही हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं। उनका कहना है कि वह हमेशा पार्टी के साथ खड़े रहते हैं और इस मुद्दे को लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा स्पीकर सतीश महाना से मुलाकात करेंगे, ताकि वह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कर सकें।
कलश यात्रा का विवाद
गुर्जर ने यह भी दावा किया कि गाजियाबाद के स्थानीय अधिकारियों ने जानबूझकर उनकी कलश यात्रा को रोकने की साजिश रची थी। यह यात्रा हर साल उनकी ओर से आयोजित की जाती है और 2010 से यह यात्रा नियमित रूप से निकाली जाती रही है। गुर्जर का आरोप है कि उनके पास जुलूस के लिए सभी आवश्यक अनुमतियाँ थीं, फिर भी पुलिस ने उनकी यात्रा को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान पुलिस के साथ झड़प में उनके कपड़े फट गए, जिसे उन्होंने रामचरितमानस का अपमान करार दिया।
मारने की साजिश का आरोप
बीजेपी विधायक ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने उनकी यात्रा रोकने के दौरान एक साजिश रची थी, जिसमें उन्हें खत्म करने की कोशिश की जा रही थी। गुर्जर ने कहा, “मुझे इस बार आईपीएस अधिकारी से जानकारी मिली थी कि पुलिस ने अनुमति के नाम पर उपद्रव पैदा कर मुझे नुकसान पहुँचाने की साजिश रची थी, इसलिए मैंने इस बार औपचारिक अनुमति ली थी।” उन्होंने यह भी कहा कि पहले सपा और बसपा की सरकार में कभी उनकी यात्रा नहीं रोकी गई, लेकिन इस बार ऐसा क्यों हुआ, इसका कारण उन्हें समझ में नहीं आ रहा।
गोहत्या के खिलाफ शिकायत
गुर्जर ने यह भी दावा किया कि उनकी शिकायत के कारण स्थानीय अधिकारियों ने उनके खिलाफ साजिश रची। उन्होंने कहा कि हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान, जब उन्होंने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से मुलाकात की और गाजियाबाद में गोहत्या की बढ़ती घटनाओं और भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की, तब से नौकरशाही और अधिकारियों ने उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया। गुर्जर ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने गोहत्या की घटनाओं के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
हिंदू मुद्दों पर सक्रियता
गुर्जर का कहना है कि उनका राजनीति में सक्रिय होना और विशेष रूप से गोहत्या और हिंदू लड़कियों की सुरक्षा के मुद्दे पर जोर देना उनकी पुरानी चिंताओं का हिस्सा है। वह 2000 के दशक में अजगर सेना (पायथन सेना) की स्थापना करने वाले नेता हैं, जिसका उद्देश्य मुस्लिमों से गायों और हिंदू लड़कियों की सुरक्षा करना था। हालांकि यह सेना अब ज्यादा सक्रिय नहीं है, फिर भी कागजों पर इसकी मौजूदगी बनी हुई है और नंदकिशोर गुर्जर इसके संरक्षक हैं।
विधायक का राजनीतिक बैकग्राउंड
नंदकिशोर गुर्जर लोनी से लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने पहली बार 2017 में चुनाव जीता था और 2022 में भी अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। वह अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं और कई बार उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ टिप्पणी कर चुके हैं। गुर्जर का कहना है कि उनके खिलाफ जो साजिशें की जा रही हैं, उनका उद्देश्य उन्हें राजनीति से बाहर करना है, लेकिन वह इसके खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे।
आगे की स्थिति
यह मामला अब और अधिक राजनीतिक रंग लेता जा रहा है, और नंदकिशोर गुर्जर के आरोपों ने प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को गरमा दिया है। अब देखना यह है कि उनकी शिकायतों पर सरकार और पार्टी क्या कदम उठाती है, और क्या गुर्जर को अपनी यात्रा और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर और कोई प्रतिक्रिया मिलती है।
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