जयशंकर और जूली बिशप की म्यांमार पर अहम मुलाकात, सीमा स्थिरता पर चर्चा
दिल्ली: मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की म्यांमार के लिए विशेष दूत जूली बिशप के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस चर्चा में दोनों नेताओं ने म्यांमार में बढ़ते संकट, सीमा पर स्थिरता, शरणार्थियों की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय अपराध, और म्यांमार को आर्थिक सहायता प्रदान करने के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। जूली बिशप वर्तमान में भारत की यात्रा पर हैं, और इस बैठक में म्यांमार के राजनीतिक हालात पर भी गहन विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
म्यांमार का संकट और अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ
म्यांमार में फरवरी 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से वहां के हालात बहुत खराब हो गए हैं। लोकतंत्र की बहाली की मांग को लेकर देशभर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस संकट ने न केवल म्यांमार को, बल्कि उसके पड़ोसी देशों को भी प्रभावित किया है। भारत ने इस संदर्भ में सीमा सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए हैं, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी में सीमा पर बाड़ लगाने की योजना की घोषणा की थी, ताकि सीमा पार से होने वाली अस्थिरता को रोका जा सके।
महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए इस मुलाकात के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “मैंने जूली बिशप से मुलाकात की और सीमा पर स्थिरता, शरणार्थी संकट, म्यांमार से उत्पन्न होने वाले अंतरराष्ट्रीय अपराध, और म्यांमार को आर्थिक सहायता प्रदान करने के विषय पर चर्चा की। हम दोनों के बीच राजनीतिक स्थिति पर भी विचार-विमर्श हुआ।”
बिशप को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पिछले साल अप्रैल में म्यांमार के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था, और इस यात्रा के दौरान बिशप ने म्यांमार में जारी संकट पर दुनिया के सामने नई जानकारी साझा करने का इरादा जताया है।
भारत और म्यांमार के द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा
मुलाकात के दौरान, भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के नेताओं ने आपसी व्यापार को बढ़ावा देने और सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और म्यांमार के वाणिज्य मंत्रालय के उप मंत्री महामहिम यू मिन मिन भी बैठक में मौजूद थे।
साथ ही, इस बैठक में फार्मास्यूटिकल्स, दालों और बीन्स, पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार को बढ़ाने और नए व्यापार निपटान तंत्र के अधिक उपयोग की संभावना पर भी विचार किया गया। भारत और म्यांमार के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक संबंधों में निरंतर वृद्धि देखी गई है, और इस दिशा में और भी नए कदम उठाए जा सकते हैं।
भारत की भूमिका और आगे की दिशा
भारत म्यांमार के संकट को न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक दृष्टिकोण से भी गंभीर मानता है। इस संकट के समाधान में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जयशंकर और बिशप की इस मुलाकात में यह स्पष्ट हुआ कि भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच समन्वय जारी रहेगा, ताकि म्यांमार में स्थिरता लाई जा सके और शरणार्थी संकट का समाधान निकाला जा सके।
आखिरकार, इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया कि म्यांमार में बदलते हालात केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक बड़ा चुनौती बन चुके हैं। भारत का यह दृष्टिकोण न केवल म्यांमार को शांतिपूर्ण तरीके से स्थिर करने की ओर है, बल्कि यह भारत और म्यांमार के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को भी एक नई दिशा देने की ओर अग्रसर है।
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