RSS ने अपनी शताब्दी वर्ष के अवसर पर समरस और संगठित हिंदू समाज बनाने का संकल्प लिया
नई दिल्ली, 23 मार्च 2025 – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है और इस ऐतिहासिक अवसर पर संघ ने दुनिया भर में शांति, समृद्धि और एकता के लिए समरस और संगठित हिंदू समाज के निर्माण का संकल्प लिया है। संघ ने यह बयान अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के तीसरे दिन जारी किया, जिसमें शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम और संघ कार्य के उद्देश्य पर विस्तृत चर्चा की गई।
संघ ने अपने बयान में कहा, “हिंदू समाज अनंत काल से एक अविस्मरणीय यात्रा में साधनारत रहा है, जिसका उद्देश्य मानव एकता और विश्व कल्याण है। यह यात्रा आज भी संतों, धर्माचार्यों और महापुरुषों के आशीर्वाद से निरंतर आगे बढ़ रही है।” संघ के अनुसार, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी और उनके द्वारा स्थापित दैनिक शाखाओं के माध्यम से व्यक्ति निर्माण की एक अनूठी पद्धति विकसित की गई थी, जो आज भी राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संघ कार्य के विस्तार पर चर्चा
RSS ने शताब्दी वर्ष के इस मौके पर अपने कार्य विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा की। संघ ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संगठन ने हिंदू समाज के लिए समर्पित होकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम किया है। संघ का मानना है कि भारतीय संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के आधार पर ही एक सौहार्दपूर्ण और समृद्ध विश्व का निर्माण किया जा सकता है।
संघ के अनुसार, “हमारा चिंतन विभेदकारी प्रवृत्तियों से मनुष्य को सुरक्षित रखते हुए एकता और शांति को सुनिश्चित करता है।” संघ ने यह भी कहा कि धर्म के आधार पर संगठित और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हिंदू समाज ही अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वाह कर सकता है।
समरसता और पर्यावरण का संदर्भ
संघ ने इस अवसर पर समरसता युक्त समाज की आवश्यकता को भी प्रमुखता दी। उन्होंने कहा, “हमारा कर्त्तव्य है कि हम समाज में समरसता का निर्माण करें, पर्यावरण से जुड़ी जीवनशैली अपनाएं और नागरिक कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहें। यही हमारे राष्ट्र निर्माण का आधार होगा।” संघ ने इस संकल्प के तहत भारत को एक संगठित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का प्रण लिया है, जो दुनिया के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत कर सके।
विजयादशमी 2025 से शताब्दी वर्ष का उद्घाटन
RSS ने घोषणा की कि विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक संघ की शताब्दी वर्ष मनाया जाएगा। इस सालभर के कार्यक्रम में संघ कार्य के इतिहास, भविष्य की योजनाओं और आगामी गतिविधियों पर विचार किया जाएगा। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार के बारे में भी प्रस्ताव पारित किया गया। संघ ने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि बांग्लादेश में भारतीय अल्पसंख्यकों की रक्षा की जाए और उनकी स्थिति में सुधार लाया जाए।
संघ के शताब्दी यात्रा पर चर्चा
संघ ने अपने 100 वर्षों के सफर को लेकर भी एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें उन्होंने अपने कार्य के विस्तार और आने वाले समय में इसके और प्रभावी रूप से कार्य करने की योजनाओं पर चर्चा की। इस दौरान विशेष रूप से उन गतिविधियों पर जोर दिया गया, जो समाज की भलाई के लिए किए गए हैं और आगे भी किए जाएंगे। संघ ने अपनी ताकत को बढ़ाते हुए अधिक से अधिक समाज के हर वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने का संकल्प लिया है।
संघ का भविष्य और समाज की भूमिका
RSS ने यह भी कहा कि भारतीय समाज को संगठित करने के लिए संघ की भूमिका महत्वपूर्ण है, और इस दिशा में संगठन ने कई ठोस कदम उठाए हैं। संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के पास एक ऐसा अद्वितीय अनुभव है, जो विश्व शांति और समृद्धि के लिए कारगर सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा, “हमारे चिंतन से ही दुनिया में एकता, शांति और सौहार्द बढ़ सकता है, और हम इस दिशा में अपनी पूरी शक्ति से काम करेंगे।”
संघ की शताब्दी यात्रा के इस ऐतिहासिक मौके पर उसके कार्यकर्ताओं और समाज के साथियों को पुनः याद दिलाया गया कि उनका कर्तव्य केवल समाज को संगठित करना नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा में अपना योगदान सुनिश्चित करना भी है। संघ ने इस अवसर पर सभी से यह संकल्प करने की अपील की कि वे राष्ट्र के निर्माण और समाज के कल्याण के लिए अपने कार्यों में निष्ठा और समर्पण दिखाएं।
इस प्रकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी शताब्दी के उपलक्ष्य में एक नया संकल्प लिया है और आगामी वर्षों में अपने कार्यों को और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने का दावा किया है। संघ का मानना है कि यह संकल्प न केवल हिंदू समाज के उत्थान के लिए होगा, बल्कि एक समृद्ध, संगठित और शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण की दिशा में भी मदद करेगा।
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