बरेली में दिल दहला देने वाली वारदात: छात्र पर बेरहम हमला, जिंदगीभर की मिली सजा – कोर्ट का बड़ा फैसला!
सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को सुनाई उम्रकैद, कहा – ऐसी दरिंदगी बर्दाश्त नहीं!
बरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भोजीपुरा से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक पॉलिटेक्निक छात्र पर बेरहमी से हमला किया गया, जिससे वह जिंदगीभर के लिए अपाहिज हो गया। इस घटना के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है। अदालत ने कहा कि अपराध इतना भयावह था कि इसके लिए कठोरतम दंड जरूरी है।
क्या हुआ था 9 अप्रैल 2020 की रात?
यह खौफनाक घटना 9 अप्रैल 2020 की है, जब 24 वर्षीय जसवंत मौर्य, जो पॉलिटेक्निक का छात्र था, अपने ही घर में सुरक्षित नहीं था। उस शाम उसकी भाभी उर्मिला छत पर कपड़े डालने गई थी। तभी पड़ोस में रहने वाले मोर सिंह ने उसे गंदी-गंदी गालियां देनी शुरू कर दी।
जसवंत ने जब इसका विरोध किया, तो मोर सिंह को गुस्सा आ गया। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। थोड़ी ही देर में उसके भाई नरोत्तम दास, सुरेंद्र और अशोक भी वहां आ गए। चारों ने मिलकर जसवंत पर जानलेवा हमला कर दिया। उनके हाथों में लोहे की रॉड, खटिया की पट्टी और डंडे थे। जसवंत को सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। वह लहूलुहान होकर ज़मीन पर गिर पड़ा और बेहोश हो गया।
तीन महीने तक कोमा में रहा, जब उठा तो जिंदगी बदल चुकी थी
हमले के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग तुरंत उसे भोजीपुरा सरकारी अस्पताल ले गए, जहां उसकी हालत नाजुक देखकर डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से भी हालात बिगड़ने पर उसे एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने उसकी सिर की दो सर्जरी की, लेकिन चोट इतनी गहरी थी कि वह तीन महीने तक कोमा में रहा। जब उसे होश आया, तो उसकी दोनों आंखों की रोशनी जा चुकी थी। वह न चल सकता था, न बोल सकता था और न ही खुद से खाना खा सकता था।
कोर्ट में चली लंबी लड़ाई, 10 गवाहों ने पेश किए सबूत
इस बर्बर हमले के बाद जसवंत के परिवार ने भोजीपुरा थाने में हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने जांच के बाद मुख्य आरोपियों मोर सिंह और नरोत्तम दास के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
कोर्ट में 10 गवाहों की गवाही पेश की गई, जिसमें डॉक्टरों के बयान भी शामिल थे। सरकारी वकील एडीजीसी संतोष श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि अपराध सुनियोजित था और इसे अंजाम देने वाले पूरी तरह से निर्दयी थे।
“शठे शाठ्यम समाचरेत्” – अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
जज रवि कुमार दिवाकर ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को सख्त सजा देना जरूरी है। उन्होंने कहा:
“शठे शाठ्यम समाचरेत्” यानी दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना चाहिए। अगर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का कानून से भरोसा उठ जाएगा।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जसवंत पर ऐसा हमला किया गया कि वह जीवन भर के लिए लाचार हो गया। उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। वह खुद से चलने-फिरने और खाने-पीने में असमर्थ है।
कोर्ट का कड़ा संदेश: ऐसी दरिंदगी बर्दाश्त नहीं
कोर्ट ने अपराधियों पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध के लिए कोई रियायत नहीं दी जा सकती। अदालत ने मुख्य आरोपियों मोर सिंह और नरोत्तम दास को उम्रकैद की सजा सुनाई।
क्या यह न्याय है या देर से मिला इंसाफ?
जसवंत के परिवार ने इस फैसले पर संतोष जताया, लेकिन उनकी आंखों में आंसू थे। उनका कहना था कि “हमने हमारा बेटा तो खो दिया, लेकिन कम से कम हमें न्याय मिला।”
अब सवाल यह है कि क्या इस फैसले से समाज में अपराधियों को सबक मिलेगा? क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन जसवंत की दर्दनाक कहानी हमेशा याद दिलाएगी कि न्याय की लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन सच की जीत जरूर होती है।
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