क्या लखनऊ सच में महिलाओं के लिए सुरक्षित है? महिला हत्याकांड ने उठाए बड़े सवाल
लखनऊ की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है। राजधानी के मलिहाबाद इलाके में हुई एक महिला की हत्या ने सभी को हिला दिया है और अब इस मामले ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या उत्तर प्रदेश की राजधानी सच में महिलाओं के लिए सुरक्षित है?
मामला मंगलवार रात का है, जब अयोध्या की रहने वाली एक महिला, जो वाराणसी में इंटरव्यू देने गई थी, वापस लखनऊ लौट रही थी। महिला ने रात के लगभग 1:30 बजे आलमबाग बस अड्डे पर उतरने के बाद भाई को फोन किया और बताया कि वह चिनहट के लिए ऑटो ले रही है। इसके बाद, उसने 2 बजे अपने भाई को फोन करके कहा कि ऑटो वाला उसे गलत रास्ते पर ले जा रहा है। रात 2:35 बजे, महिला ने अपनी आखिरी लोकेशन भेजी, जिसके बाद उसका फोन अचानक बंद हो गया।
पुलिस ने एक घंटे बाद शुरू की कार्रवाई, फिर मिली लाश
महिला के फोन बंद होने के बाद उसके भाई ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस की टीम को कार्रवाई में एक घंटे का वक्त लगा। इसके बाद, पुलिस को मलिहाबाद के वाजिदनगर इलाके में एक बाग में महिला का शव मिला। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने पूरी तरह से लापरवाही दिखाई। इस घटना के बाद, पुलिस कमिश्नर ने आलमबाग थाने के प्रभारी सहित सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।
पुलिस की 60 सदस्यीय टीम हत्यारे की तलाश में
महिला की हत्या के मामले को लेकर पुलिस ने 60 पुलिसकर्मियों की टीम बनाई है और उन्हें मामले की जांच में लगाया है। डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक, पुलिस की छह अलग-अलग टीमों ने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं। इनमें से एक टीम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, जबकि दूसरी टीम सर्विलांस के जरिए मोबाइल नंबरों की जानकारी हासिल कर रही है। इसके अलावा, एक टीम संदिग्ध ऑटो की तलाश में जुटी है।
500 सीसीटीवी फुटेज की जांच, फिर भी खाली हाथ
पुलिस ने घटनास्थल के आस-पास के 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। मलिहाबाद से आलमबाग की दूरी करीब 30 किलोमीटर है, और पुलिस को इस रूट पर संदिग्ध ऑटो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन पहचान की प्रक्रिया में समस्या आ रही है। मलिहाबाद के कसमंडी चौराहे पर एक संदिग्ध ऑटो नजर आया है, लेकिन उसकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
50 संदिग्धों से पूछताछ और 5000 मोबाइल नंबर की जांच
पुलिस ने 50 संदिग्धों से पूछताछ की है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया। साथ ही, पुलिस ने 5000 सक्रिय मोबाइल नंबरों के डेटा की जांच शुरू की है, जो रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक सक्रिय थे। सर्विलांस टीम इन नंबरों की गहन जांच कर रही है, लेकिन अभी तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।
इस घटना ने राजधानी लखनऊ में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘सुरक्षित लखनऊ’ का दावा अब इस हत्याकांड के बाद खंडित नजर आ रहा है। क्या पुलिस प्रशासन सही समय पर कार्रवाई करता, तो क्या यह हादसा टल सकता था? इस सवाल का जवाब शायद कभी न मिले, लेकिन इस वारदात ने लखनऊ के सुरक्षा तंत्र की असलियत को बेनकाब कर दिया है।
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