हर्षा रिछारिया का बड़ा बयान: बेटियों को ‘चांडाल’ बनाना होगा, संभल में लिया संकल्प!
पूर्व मॉडल और एंकर हर्षा रिछारिया, जिन्होंने हाल ही में साध्वी का मार्ग अपनाया, रविवार को संभल पहुंची और वहां उन्होंने एक अहम बयान दिया। इस दौरान हर्षा ने कहा कि बेटियों को अब बेटी के रूप में नहीं, बल्कि ‘चांडाल’ बनाकर रखना होगा, ताकि वे अपनी रक्षा खुद कर सकें। महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े में भाग लेने के बाद हर्षा रिछारिया ने यह बयान दिया और अपने जीवन के नए उद्देश्य की बात की।
हर्षा रिछारिया ने अपने बयान में कहा कि जब धरती पर पाप बढ़ेगा, तब भगवान नारायण का अवतार होगा और इस बार यह अवतार संभल में होगा। उन्होंने इस मौके पर संभल की पवित्र माटी में आकर धन्य होने का एहसास किया और कहा कि महाकुंभ के दौरान उनकी जिंदगी बदल गई। अब वह सनातन धर्म और धर्मशास्त्र को जानने और सीखने के लिए निकल पड़ी हैं।
संभल पहुंचने पर हर्षा रिछारिया का भव्य स्वागत हुआ और उन्होंने शहर के प्रमुख मंदिरों का दौरा किया। हर्षा ने कार्तिकेय महादेव मंदिर, मनोकामना छैमनाथ मंदिर और कल्कि विष्णु मंदिर में दर्शन किए। इसके अलावा, हर्षा ने कहा कि वह यहां के सभी तीर्थ और कूपों का भी दर्शन करेंगी, और यह कि उन्हें संभल आने का मौका मिलना उनके लिए बहुत भाग्यशाली अनुभव है।
महाकुंभ की तारीफ करते हुए हर्षा ने कहा कि जिस प्रकार से महाकुंभ ने सेटेलाइट के माध्यम से दुनिया भर में पहचान बनाई, ठीक वैसे ही संभल की ख्याति भी जल्द ही देश-दुनिया में पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि संभल की पवित्रता और महत्व को अब हर कोई जानने लगेगा।
बेटियों के सुरक्षा मुद्दे पर हर्षा ने कहा, “हमें बेटियों को बेटी के रूप में नहीं, बल्कि चांडाल बनाकर रखना होगा ताकि वे खुद अपनी रक्षा कर सकें।” उनका कहना था कि बेटियों के माता-पिता पहले अक्सर यह चिंता करते थे कि बेटियां अकेले कैसे जाएंगी, लेकिन यदि हम अपनी रक्षा करने का संकल्प लें तो इस तरह की चिंताएं कम हो सकती हैं।
हर्षा रिछारिया ने हिंदू समाज की पहचान भगवा रंग पर भी टिप्पणी की और कहा कि भगवा रंग सनातन धर्म की पहचान है और इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने संभल के सीओ अनुज चौधरी के बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने “एक होली और 52 जुमा” की बात की थी। इस पर हो रही राजनीति की आलोचना करते हुए हर्षा ने कहा कि हिंदू समाज के खिलाफ हुए अतीत के हिंसा पर राजनीतिक दलों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने आगे कहा, “यहां हिंदुओं के खिलाफ दंगे हुए, उन्हें जलाया गया, ट्रेनें जलाई गईं, लेकिन कोई राजनीतिक दल इन घटनाओं पर चर्चा करने को तैयार नहीं है। अब देश में सनातन धर्म की लहर चल रही है, और यह एक बड़ा बदलाव है। इस बदलाव में हर सनातनी को हिस्सा लेना चाहिए।”
हर्षा रिछारिया का यह बयान न केवल उनके खुद के धर्म परिवर्तन के फैसले को स्पष्ट करता है, बल्कि समाज में चल रहे सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों पर भी एक जोरदार प्रतिक्रिया है। उनके शब्दों ने संभल में राजनीति और समाज के साथ-साथ देशभर में चर्चा का नया माहौल बना दिया है।
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