April 24, 2026

सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में अतिरिक्त 51,462.86 करोड़ रुपये के शुद्ध व्यय को मंजूरी देने के लिए संसद से की अपील

मार्च में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने 51,462.86 करोड़ रुपये का अतिरिक्त शुद्ध व्यय करने के लिए सोमवार को संसद से मंजूरी की मांग की है। इस अतिरिक्त व्यय का बड़ा हिस्सा पेंशन और उर्वरक सब्सिडी पर खर्च किया जाएगा। सरकार की ओर से उठाए गए कदम से यह स्पष्ट है कि चालू वित्त वर्ष में व्यय की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, जो सरकार की सामाजिक और आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया अनुपूरक अनुदान मांगों का दूसरा बैच

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में अनुपूरक अनुदान मांगों का दूसरा बैच पेश करते हुए बताया कि कुल अतिरिक्त व्यय 6.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। हालांकि, इसमें से 6.27 लाख करोड़ रुपये की भरपाई बचत और प्राप्तियों के मद से की जाएगी। सरकार का यह कदम आर्थिक संतुलन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है, जबकि इसके माध्यम से महत्वपूर्ण सार्वजनिक योजनाओं की फंडिंग भी सुनिश्चित की जाएगी।

अतिरिक्त व्यय में प्रमुख मदें: पेंशन, उर्वरक और रक्षा पर होगी अधिक खर्च

सरकार के प्रस्तावित अतिरिक्त व्यय में उर्वरक सब्सिडी के लिए 12,000 करोड़ रुपये और सरकारी कर्मचारियों के पेंशन के लिए 13,449 करोड़ रुपये शामिल हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा एकीकृत पेंशन योजना (UPPS) पर खर्च होगा, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, रक्षा पेंशन के लिए 8,476 करोड़ रुपये और दूरसंचार विभाग के लिए 5,322 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जाएगी।

सरकार की आर्थिक नीति में महत्वपूर्ण बदलाव

इस अतिरिक्त व्यय का उद्देश्य न केवल सरकारी कर्मचारियों और रक्षा कर्मियों की भलाई सुनिश्चित करना है, बल्कि उर्वरक सब्सिडी के माध्यम से कृषि क्षेत्र में राहत देने के साथ-साथ देश की कृषि नीतियों को मजबूत करना भी है। वित्त मंत्रालय द्वारा यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त खर्च की योजना बना रही है।

सरकार की ओर से यह अतिरिक्त व्यय आगामी वित्तीय वर्ष की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। हालांकि, यह देखा जाएगा कि संसद से मंजूरी मिलने के बाद इसके प्रभाव देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर क्या होंगे।

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