April 22, 2026

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के बाद हथियारों का जमकर सरेंडर, क्या स्थिति में आएगा सुधार?

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद, हथियारों का सरेंडर प्रक्रिया तेज़ हो गई है। बुधवार को राज्य के छह जिलों के नागरिकों ने अपनी इच्छा से हथियार जमा कराए हैं। गुरुवार को पुलिस ने बताया कि मणिपुर के छह जिलों में कुल 104 हथियार और गोला-बारूद सुरक्षाबलों को सौंपे गए हैं, जिसमें इम्फाल पश्चिम जिले से सबसे अधिक हथियार जमा हुए हैं। इन हथियारों में 12 कार्बाइन मशीन गन और उनकी मैगजीन भी शामिल हैं। यह हथियार राज्य में 2023 में हुए जातीय हिंसा के बाद जुटाए गए थे, जो अब राष्ट्रपति शासन के तहत वापस किए जा रहे हैं।

राज्यपाल का आदेश: स्वेच्छा से हथियार सरेंडर करने की अपील
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने नागरिकों से अपील की थी कि वे अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सात दिन के भीतर स्वेच्छा से पुलिस के हवाले कर दें। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस अवधि के दौरान हथियार सौंपने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस अवधि के बाद हथियार नहीं सौंपे गए तो सुरक्षा बलों द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन: क्या बदलाव आएगा?
मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच, 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। मई 2023 से इम्फाल घाटी और आसपास के पहाड़ी इलाकों में जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए थे, और हजारों लोग बेघर हो गए थे। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर हिंसा के काबू में न आने के आरोप थे, जिसके चलते उन्होंने 9 फरवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई, और केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।

मुख्यमंत्री का इस्तीफा और उसके बाद की स्थिति
मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को इस्तीफा दिया, जिसे राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने स्वीकार कर लिया। बीरेन सिंह पर राज्य में हिंसा के मुद्दे पर भारी दबाव था, और विपक्षी दल भी लगातार सवाल उठा रहे थे। इस्तीफा देने से पहले, बीरेन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद, मणिपुर में स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन राज्य में हिंसा और अस्थिरता को काबू में लाने के लिए और कितनी कोशिशें की जाएंगी, यह देखना होगा। इन हथियारों के सरेंडर से क्या स्थिति में सुधार होगा, या यह केवल एक अस्थायी कदम साबित होगा, इस पर अभी भी सवाल बने हुए हैं।

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