महंगाई पर वार! क्या इस साल 1.5% घट सकती है रेपो रेट? जानिए आरबीआई का मास्टर प्लान
नई दिल्ली: आम लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर आ सकती है! भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस साल रेपो दरों में 1.5% तक की कटौती करने की योजना बना रहा है, जिससे लोन की EMI में 5% तक की कमी हो सकती है। इस बात के संकेत खुद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दिए हैं। यदि ऐसा हुआ, तो यह 5 साल में सबसे बड़ी दर कटौती होगी, जिससे कर्जदारों को भारी राहत मिलेगी।
महंगाई पर काबू, अब सस्ती होगी EMI?
फरवरी में आई सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में खुदरा महंगाई दर 5 महीने के निचले स्तर 4.3% पर आ गई है। RBI गवर्नर को भरोसा है कि आने वाले महीनों में महंगाई और घट सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो दरों में कटौती की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया है।
RBI का मास्टर प्लान: 5 बैठकों में होगी 0.25% की कटौती?
RBI की इस साल अभी 5 बैठकें (अप्रैल, जून, अगस्त, अक्टूबर और दिसंबर) बाकी हैं। जानकारों का कहना है कि हर बैठक में 0.25% की कटौती संभव है, जिससे कुल 1.5% तक की दर में कमी हो सकती है। दिसंबर तक रेपो रेट 5% तक आने का अनुमान है।
कैसे पड़ेगा असर?
लोन पर EMI होगी सस्ती – होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें कम होंगी।
घरेलू खर्च बढ़ेगा – EMI कम होने से लोगों के पास बचत बढ़ेगी, जिससे बाजार में खरीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा – ब्याज दरें कम होने से बिजनेस लोन सस्ते होंगे, जिससे कंपनियों का निवेश बढ़ेगा और GDP को मजबूती मिलेगी।
क्या RBI का यह फैसला तय है?
हालांकि, RBI की नीतियों पर कई फैक्टर असर डाल सकते हैं। यदि महंगाई काबू में रहती है और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो रेपो दरों में कटौती तय मानी जा सकती है। लेकिन, यदि महंगाई फिर से बढ़ती है, तो RBI अपनी रणनीति बदल भी सकता है।
GDP को नई रफ्तार देने की तैयारी
RBI ने वित्त वर्ष 2025 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.4% रखा है, जो कि पिछले साल से थोड़ा कम है। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में कटौती से GDP को बूस्ट मिल सकता है। यदि सभी योजनाएं सही दिशा में चलती हैं, तो वित्त वर्ष 2026 तक भारत की GDP ग्रोथ 7% या उससे ऊपर भी जा सकती है।
क्या आपको जल्द राहत मिलेगी?
अब सबकी नजरें अप्रैल में होने वाली RBI की MPC बैठक पर टिकी हैं। अगर वहां पहली कटौती होती है, तो यह तय हो सकता है कि दिसंबर तक आ
पकी EMI और भी कम होने वाली है!
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