भारत में खाद्य तेलों पर बढ़ सकती है इंपोर्ट ड्यूटी: तेल और तिलहन की कीमतों पर असर
भारत में खाद्य तेलों पर इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर एक और बड़ा बदलाव हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत सरकार आने वाले कुछ हफ्तों में वनस्पति तेलों पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है। यह कदम घरेलू तिलहन किसानों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है, क्योंकि वे तिलहन की गिरती कीमतों से जूझ रहे हैं। यह भारत में छह महीने से भी कम समय में इंपोर्ट ड्यूटी की दूसरी बार वृद्धि हो सकती है, जिसके असर से खाद्य तेलों की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है और मांग पर भी असर पड़ सकता है।
तिलहन किसानों को राहत देने की कोशिश
भारत खाद्य तेलों का सबसे बड़ा इंपोर्टर है और देश में तिलहन की गिरती कीमतों से लाखों किसानों को नुकसान हो रहा है। सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी में इजाफे पर विचार कर रही है। दो सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव पर अंतर-मंत्रालयी परामर्श अब समाप्त हो चुका है और सरकार इस पर जल्द ही निर्णय ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार खाद्य महंगाई पर फैसले के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए ही शुल्क वृद्धि करेगी।
सितंबर में भी बढ़ी थी इंपोर्ट ड्यूटी
भारत ने सितंबर 2024 में वनस्पति तेलों पर 20 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाई थी। इस वृद्धि के बाद कच्चे पाम तेल, कच्चे सोया तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर 27.5 फीसदी आयात शुल्क लगाया गया था, जो पहले केवल 5.5 फीसदी था। इन तीन तेलों के रिफाइंड ग्रेड पर भी इंपोर्ट टैक्स 35.75 फीसदी तक पहुंच गया था। बावजूद इसके, सोयाबीन की कीमतें राज्य द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य से 10 फीसदी से अधिक नीचे बनी हुई हैं।
घरेलू कीमतों में गिरावट
भारत में घरेलू सोयाबीन की कीमतें लगभग 4,300 रुपये प्रति 100 किलोग्राम हैं, जो राज्य द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 4,892 रुपये से कम हैं। तिलहन की कम कीमतों को देखते हुए, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना एक समझदारी का कदम प्रतीत होता है, हालांकि इस वृद्धि की सही मात्रा अभी तक तय नहीं की गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से तिलहन किसानों को मदद मिलेगी, जो मौजूदा समय में आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
रिफाइनर्स ने किए ऑर्डर कैंसल
इसके अलावा, भारतीय रिफाइनर्स ने आयात शुल्क में संभावित वृद्धि के कारण मार्च से जून के बीच डिलीवरी के लिए निर्धारित 100,000 मीट्रिक टन कच्चे पाम तेल के ऑर्डर को कैंसल कर दिया है। यह भारत के खाद्य तेल बाजार पर और दबाव बना सकता है। भारत अपनी वनस्पति तेल की जरूरत का लगभग दो-तिहाई इंपोर्ट के जरिए पूरा करता है। पाम तेल की मुख्य आपूर्ति इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से होती है, जबकि सोया तेल और सूरजमुखी तेल का इंपोर्ट अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से किया जाता है।
इस बदलाव के कारण खाद्य तेलों के बाजार में हलचल मच सकती है, जिससे स्थानीय तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और इसके साथ ही बाजार में विदेशी तेलों की मांग में गिरावट आ सकती है।
Share this content:
