April 24, 2026

क्या मायावती के बिना 2024 के चुनाव परिणाम होते अलग? राहुल गांधी और मायावती के बयानों से राजनीतिक तापमान बढ़ा

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में इन दिनों एक नया बवाल गर्माया हुआ है, जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि अगर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती इंडिया गठबंधन का हिस्सा होतीं तो 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम कुछ और ही होते। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मायावती का साथ मिलने पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सत्ता में नहीं आती। इस बयान ने सियासी हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। वहीं, मायावती ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर तीखे सवाल उठाए हैं। आइए जानते हैं क्या है इन दोनों नेताओं के बयानों का राजनीतिक महत्व और क्या सच में मायावती का साथ मिलने से 2024 का चुनाव परिणाम बदल सकता था?

राहुल गांधी का दावा: मायावती का साथ होता तो बीजेपी सत्ता में नहीं होती

राहुल गांधी ने गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में एक सभा के दौरान कहा कि यदि मायावती उनके साथ मिलकर चुनाव लातीं, तो 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणाम पूरी तरह अलग होते। उन्होंने कहा, “मैं चाहता था कि बसपा हमारे साथ मिलकर चुनाव लड़े, लेकिन पता नहीं मायावती क्यों ठीक से चुनाव नहीं लड़ रही हैं। अगर तीनों पार्टियां (कांग्रेस, सपा और बसपा) एक साथ हो जातीं तो नतीजे कुछ और ही होते।”

राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। उनकी यह बात मायावती के लिए सीधी चुनौती थी, जिसके बाद मायावती ने राहुल के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

मायावती ने पलटवार किया: कांग्रेस पर सवाल उठाए

राहुल गांधी के बयान के बाद मायावती ने एक बयान जारी करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। मायावती ने कहा, “कांग्रेस उन राज्यों में कहां है, जहां वह मजबूत है? वहां की स्थिति क्या है? यूपी जैसे राज्य में, जहां कांग्रेस कमजोर है, वहां बसपा को बरगलाने की बातें करना कांग्रेस का दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है?” उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से बसपा को हमेशा ही नुकसान हुआ है, क्योंकि बसपा का वोट ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन कांग्रेस का वोट कभी बसपा को ट्रांसफर नहीं होता।

मायावती ने यह भी कहा कि कांग्रेस और अन्य जातिवादी पार्टियां बसपा के वोटबैंक से फायदा उठाती हैं, लेकिन बदले में उनका वोटबैंक बसपा को नहीं देता।

क्या वाकई मायावती का साथ कांग्रेस के लिए फायदेमंद होता?

राहुल गांधी के बयान पर राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या मायावती का साथ वाकई कांग्रेस और सपा के लिए फायदेमंद हो सकता था? आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा को 9.39 प्रतिशत वोट मिले थे। अगर बसपा, सपा और कांग्रेस एकजुट होते तो यूपी में बीजेपी को मुश्किलों का सामना करना पड़ता।

2019 के चुनाव में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में बीजेपी ने 33, सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं। अगर बसपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा होती, तो इन 80 सीटों में बीजेपी की सीटें घट सकती थीं। विश्लेषकों के मुताबिक, बसपा के साथ होने पर इंडिया गठबंधन यूपी में 66 सीटों तक पहुंच सकता था, जबकि बीजेपी केवल 19 सीटों तक सीमित रह सकती थी।

बसपा का इतिहास और गठबंधन का प्रभाव

बसपा ने अपने राजनीतिक इतिहास में सिर्फ एक बार कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था, और वह भी 1996 के लोकसभा चुनाव में। उस समय कांग्रेस के साथ मिलकर बसपा ने सीटों में तो वृद्धि की, लेकिन कांग्रेस का वोट शेयर घटा। मायावती ने कभी भी कांग्रेस के साथ गठबंधन को पूरी तरह से सकारात्मक नहीं माना, क्योंकि उन्हें लगता था कि कांग्रेस का वोट ट्रांसफर नहीं होता, जबकि उनकी पार्टी का वोट कांग्रेस को जाता है।

कांग्रेस और बसपा के गठबंधन का भविष्य क्या है?

अब सवाल यह उठता है कि क्या 2024 के चुनाव में मायावती का साथ कांग्रेस और सपा के लिए इतना फायदेमंद होता कि बीजेपी को सत्ता से बाहर कर दिया जाता? अगर बसपा इंडिया गठबंधन के साथ होती, तो न केवल यूपी, बल्कि दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी गठबंधन का असर देखा जा सकता था। खासकर दलित समुदाय का समर्थन जो मायावती के साथ जुड़ा हुआ है, कांग्रेस और सपा के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता था।

इस बीच, राहुल गांधी और मायावती के बीच बढ़ी हुई तकरार सियासी भविष्यवाणियों को और भी दिलचस्प बना देती है। क्या दोनों पार्टियां एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ अपना मोर्चा मजबूत कर सकती हैं? या फिर दोनों के बीच यह मतभेद सियासी गठबंधन की राह में बाधा बनेंगे? ये सवाल आगामी चुनावों के लिहाज से अहम साबित हो सकते हैं।

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