April 25, 2026

दिल्ली चुनाव पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच विवाद: क्या था असली कारण?

दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की पार्टी की पराजय पर तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के बीच असहमति का बड़ा खुलासा हुआ है। ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम के बाद कहा था कि अगर दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) का गठबंधन होता, तो नतीजे अलग हो सकते थे। उन्होंने कहा कि आप-कांग्रेस के बीच समन्वय की कमी की वजह से भाजपा को फायदा हुआ।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी इस बयान से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अगर आप-कांग्रेस गठबंधन हो भी जाता, तो इसका कोई खास फर्क नहीं पड़ता। चार या पांच सीटों पर नतीजे अलग हो सकते थे, लेकिन इससे अधिक कुछ नहीं होता।” अभिषेक ने साफ तौर पर कहा कि दिल्ली की जनता ने बदलाव की आवश्यकता महसूस की थी, और यह हार एक चुनावी गणना का परिणाम है, जो कहीं ना कहीं भाजपा की सशक्त प्रचार रणनीति के कारण हुई।

क्या दिल्ली में कांग्रेस-आप गठबंधन ने भाजपा को बढ़ावा दिया?

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटें जीतकर 27 साल बाद सत्ता में वापसी की है, जबकि आप केवल 22 सीटें जीत सकी और कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई। ममता ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस-आप के बीच वोटों का बंटवारा भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘लचीलापन’ के कारण भाजपा ने दिल्ली और हरियाणा दोनों राज्यों में फायदा उठाया।

क्या यह हार सिर्फ प्रचार का परिणाम था?

अभिषेक बनर्जी ने कहा, “भले ही आप अकेले लड़े या गठबंधन कर के, यह देखने की बात है कि क्या जनता आपके साथ है। दिल्ली के लोगों ने महसूस किया कि इस बार बदलाव की जरूरत है, और लोकतंत्र में यही सबसे महत्वपूर्ण है।” उनका मानना था कि भाजपा के झूठे प्रचार का आप पार्टी प्रभावी रूप से जवाब नहीं दे पाई, यही इस हार का असली कारण था।

अब ध्यान बंगाल की तरफ

इस बीच, अभिषेक बनर्जी ने अपनी लोकसभा सीट डायमंड हार्बर के सतगछिया में आयोजित ‘सेवाश्रय’ शिविर का दौरा किया और केंद्र सरकार के बजट पर भी तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट बंगाल विरोधी है, जो राज्य के विकास को रोकने का एक सुनियोजित प्रयास है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार ने बिहार को तो भरपूर बजट आवंटित किया है, लेकिन बंगाल को इससे वंचित रखा गया है।

दिल्ली चुनाव के बाद अब सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा के खिलाफ सही रणनीति को अपनाया गया था या फिर राजनीतिक गलती ने कांग्रेस और आप को भारी नुकसान पहुंचाया?

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